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कहीं पैसे लेकर तो कहीं जमीन लिखवाकर, सरकारी नौकरियां यूं ही बिकती रहेंगी तो कहां जाएंगे देश के युवा?

भारत में युवा आबादी की बहुतायत का देश को नाज है तो दुनिया भी हमारी तरफ बहुत उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। डेढ़ अरब की जनसंख्या में करोड़ों युवाओं की तादाद अवसर है तो चुनौती भी। आज केंद्र से लेकर राज्य तक की सरकारों पर युवाओं को रोजगार देने की बड़ी जिम्मेदारी है। उधर, विशेष तौर पर हिंदी भाषी राज्यों में रोजगार के अवसरों की इतनी कमी है कि यहां पलायन चरम पर पहुंच चुका है। दूसरी तरफ सरकारी नौकरियों में जमकर धांधली के एक से बढ़कर एक सबूत मिल रहे हैं। बिहार में रेलवे की नौकरियों के लिए जमीन लेने (Land For Jobs Scam) के मामले में लालू प्रसाद यादव का परिवार बुरी तरह घिर चुका है। फिर बंगाल से लेकर असम और तमिलनाडु तक, गैर-हिंदी राज्यों में भी सरकारी नौकरियों में जबर्दस्त घोटाले की खबरों ने युवाओं को बुरी तरह मायूस कर रखा है।

तमिलनाडु के मंत्री के. सेंथिल बालाजी को ईडी नौकरियों में फर्जीवाड़े के आरोप में गिरफ्तार कर चुकी है। प. बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के ठिकाने पर नोटों का खजाना पूरा देश देख चुका है। वो भी कैश फॉर जॉब्स स्कैम में जेल में बंद हैं। असम में वर्ष 2013-14 के कैश फॉर जॉब्स स्कैम के मुख्य किरदार राकेश पॉल के छह साल बाद इसी वर्ष मार्च महीने में जेल से छूटने की खबरें सुर्खियों में रही हैं। असम पब्लिक सर्विस कमिशन की नौकरियों के बंदरबांट के लिए प्रदेश सरकार ने कुल 57 अधिकारियों को बर्खास्त भी किया है।

ये तो हुई सरकारी भ्रष्टाचार की बात। हैरत तो यह है कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसे प्राइवेट सेक्टर की प्रतिष्ठित कंपनी पर भी पैसे लोकर नौकरियां देने का धब्बा लग चुका है। आरोप है कि टीसीएस में नौकरी दिलाने के लिए कंपनी के कर्मचारियों के एक समूह ने 100 करोड़ रुपये की अवैध कमाई कर ली। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकारी से लेकर निजी क्षेत्र तक की नौकरियों में भ्रष्टाचार का दीमक इतना अंदर घुस चुका है तो फिर देश का युवा करे तो क्या, वह रोजगार के लिए जाए तो कहां?

देश में रोजगार के लिए सबसे ज्यादा युवाओं के पलायन वाले राज्यों में शामिल बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ तो वहां के युवाओं में सरकारी नौकरियां मिलने की नई आस जगी। नई सरकार में शामिल आरजेडी के नेता और प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बिहार में 10 लाख नई नौकरियां देने का वादा किया है। लेकिन क्या वहां प. बंगाल, तमिलनाडु और असम जैसा वाकया सामने नहीं आएगा? खुद तेजस्वी, उनके पिता लालू प्रसाद यादव और उनकी मां राबड़ी देवी रेलवे की नौकरियों के लिए जमीन लेने के मामले में चार्टशीटेड हैं। सीबीआई ने दिल्ली की अदालत में उन सबके खिलाफ सालों पुराने मामले में आरोप पत्र दाखिल किया है। इसलिए भी आशंका गहरा जाती है कि अगर बिहार में सरकारी नौकरियों की वेकैंसी निकली भी तो काबिल युवाओं को नौकरी मिल पाएगी, इसकी कितनी गारंटी है।

सोचिए, युवा देश में युवाओं के भविष्य पर ही धोखे और धांधली के बाड़ लगा दिए जा रहे हैं। यह पाप कोई और नहीं, सरकार और प्रशासन में शामिल वो लोग कर रहे हैं जिनके कंधों पर युवाओं का भविष्य संवारने की बड़ी जिम्मेदारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘अमृतकाल’ की बात करते हैं, लेकिन रोजगार के मामले में ऐसा जहरीला माहौल रहेगा तो युवा उम्मीदें तो दम ही तोड़ देंगी! ऐसे में हमारे सामने बड़ी चुनौती है कि युवा भारत की आंकाक्षाओं को नई उड़ान देने, उनमें नया जोश भरने के लिए न केवल रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा हों बल्कि युवाओं में यह विश्वास पैदा किया जाए कि अगर वो काबिल हैं तो कोई नाकाबिल, किसी भी कीमत पर उनका हक नहीं मार सकता है। अगर हमारी सरकारें यह संदेश देने में कामयाब रहीं तो आगामी वर्षों को सच में भारत का ‘अमृतकाल’ साबित करने से कोई नहीं रोक सकता।

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