राजोआना की दया याचिका पर निर्णय में देरी, केंद्र को सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते का समय दिया.
केंद्र का पक्ष: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यह मामला संवेदनशील है और अभी कुछ और जानकारी जुटाई जानी बाकी है।
अदालत की सुनवाई: जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने यह सुनवाई की।
सरकार का बयान: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ एजेंसियों से परामर्श जरूरी है।
राजोआना का पक्ष: वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि राजोआना 29 साल से जेल में हैं और उनकी याचिका 12 साल से लंबित है।
हत्या का मामला: 31 अगस्त 1995 को हुए बम धमाके में मुख्यमंत्री बेअंत सिंह & 17 लोगों की मौत हुई थी।
दोष सिद्धि: 2007 में राजोआना और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया।
बब्बर खालसा से संबंध: राजोआना बब्बर खालसा के सदस्य हैं, जो खालिस्तान आंदोलन के लिए कुख्यात है।
राष्ट्र सुरक्षा का मुद्दा: केंद्र ने उनकी रिहाई को राष्ट्र सुरक्षा से जोड़ा है।
दया याचिका: राजोआना की दया याचिका 2012 से लंबित है।
अगली सुनवाई: अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को निर्धारित की है।
पृष्ठभूमि:
बेअंत सिंह की हत्या के मामले में राजोआना को 1996 में गिरफ्तार किया गया था।
ट्रायल कोर्ट ने 2007 में राजोआना को फांसी की सजा सुनाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर को राष्ट्रपति से याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था, जिसे केंद्र की अपील पर स्थगित कर दिया गया।



