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मर्ज हो जाएगी पार्टी या अकेले रह जाएंगे चाचा पशुपति पारस! जानिए अंदर खाने में क्या चल रहा

चिराग पासवान और चाचा पशुपति पारस के बीच हाजीपुर की लोकसभा सीट को लेकर लड़ाई जारी है। ना चाचा पीछे से हटने को तैयार और ना ही भतीजा। लिहाजा दोनों के बीच तलवारें खींची हुई है। एक तरफ 18 जुलाई को एनडीए की बैठक में चिराग पासवान ने जहां चाचा पशुपति पारस के पांव छुए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांव छू कर और गले लग कर बहुत सारे समीकरण साध लिए। बीजेपी से गिले शिकवे खत्म किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चिराग पासवान को गले लगाकर भरोसे की थपकी दी। चिराग पासवान ने भी आव देखा ना ताव मौके पर लगाया चौका और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अभिभावक बता दिया। उन्होंने पिता रामविलास पासवान के बाद मोदी को अपना पिता बताया और सीधे उनके शरण में होने की बात कह डाली।

बदले-बदले नजर आए चिराग के तेवर

इस घटना के बाद चिराग पासवान के तेवर बदले बदले नजर आए। एक तरफ जहां उन्होंने साफ तौर पर यह कह दिया कि हाजीपुर सीट पर केवल उन्हीं का हक है। वहीं चाचा के इमोशनल कार्ड पर भी उन्होंने नसीहत दे डाली। चाचा पशुपति पारस को यहां तक कह डाला कि उन्हें जो भी बात करनी है। वह अकेले में करें पार्टी के स्तर पर करें। सार्वजनिक तौर पर इन बातों को करने का कोई फायदा नहीं। मानने वाले अब इस बयान को चाचा को चिराग की फटकार भी मान सकते हैं।

मगर अब सत्ता की बाजी चिराग के हाथ!

जब से चिराग एनडीए का हिस्सा औपचारिक रूप से बने हैं, उसके बाद से वह तमाम मीडिया चैनलों में इंटरव्यू देते नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते नजर आ रहे हैं। बीजेपी के लंबे साथ बताते नजर आ रहे हैं। इन तमाम सारी चीजों को देखकर यह कहा जा सकता है कि फिलहाल अब बाजी चाचा नहीं भतीजे के हाथ में है। बीजेपी से मिली जानकारी के अनुसार शीर्ष नेतृत्व को भी चिराग पासवान में भविष्य नजर आता है। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को यह भी लगता है कि यदि चाचा और भतीजे की लड़ाई होती रही तो इसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ सकता है। लिहाजा, पशुपति पारस के पास लिमिटेड विकल्प है।

चाचा पर पार्टी को मर्ज करने का दबाव!

बताते चलें कि बीजेपी के लोगों का मानना है कि दोनों पार्टी को एक बार फिर से मर्ज हो जाना चाहिए। ताकि वोटों का बिखराव ना हो। आगामी लोकसभा चुनाव एनडीए वर्सेर्स आइ.एन.डी.आई.ए. होने वाला है। जिसमें इस तरह के मतभेद चिराग की चमक को कम कर सकते हैं। लिहाजा बीजेपी की तरफ से पशुपति पारस को यह साफ संकेत दे दिया गया है कि दोनों पार्टी को मर्ज करने में ही भलाई है। हालांकि चिराग पासवान ने अपने पिता की बनाई हुई पार्टी के तमाम सीटों पर अपनी दावेदारी ठोकी है। उनका सीधे तौर पर कहना है जिस पार्टी को रामविलास पासवान उनके पिता ने सींचा है। जहां के लोगों का विश्वास उनके पिता ने जीता यह उनकी विरासत है। हाजीपुर की जनता का प्रेम और विश्वास भी चाचा के मुकाबले चिराग पर ज्यादा है। ऐसे में हाजीपुर की सीट पर चिराग के मुकाबले पशुपति पारस की दावेदारी कम होती नजर आ रही है।

पशुपति पारस ने भी तरेरी आंख

एनडीए के भीतर चिराग के बढ़ते कद को लेकर चाचा की परेशानी बढ़ती जा रही है। जहां एक तरफ चाचा के हाथ से हाजीपुर की दावेदारी छूट रही है। वहीं दोनों पार्टी को एक बार फिर से मर्ज करने का दबाव भी है। इस दबाव के बीच चाचा पशुपति पारस ने बीजेपी और चिराग दोनों को आंखें दिखाया है। उन्होंने कहा टूटे दल जुड़ सकते हैं लेकिन टूटे दिल नहीं। उनके इस बयान से यह सीधा अंदाजा लगाया जा सकता है कि चाचा के ऊपर अब अपनी पार्टी को एक बार फिर से एक करने का दबाव है। लेकिन वह चिराग से जरा भी खुश नहीं हैं। उनका दिल टूटा हुआ है और यह संदेश उन्होंने बीजेपी तक पहुंचा दी है।

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