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झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने महुआ माजी को राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर कई महत्वपूर्ण हित साधने की कोशिश की है।

वर्तमान में माजी झामुमो की महिला मोर्चा की केंद्रीय अध्यक्ष हैं और सोरेन परिवार की विश्वसनीय मानी जाती हैं। रंगकर्मी माजी की रचनाओं को देश-विदेश में ख्याति मिली है। आइए जानते हैं, उन पांच कारणों के बारे में, जिनकी वजह से झामुमो ने महुआ माजी को राज्यसभा उम्मीदवार चुना है:

बड़े भाई की भूमिका बरकरार रखने की कोशिश: झामुमो राज्य में महागठबंधन के साथ 30 विधायकों के साथ सबसे बड़ा हिस्सेदार है। कांग्रेस के 17 विधायकों के समर्थन से झामुमो ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय पार्टी होते हुए भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।

परिवारवाद का ठप्पा मिटाने की कोशिश: माजी की उम्मीदवारी से झामुमो ने यह साबित करने की कोशिश की है कि पार्टी परिवारवाद से परे है। हेमंत सोरेन ने माजी को उम्मीदवार बनाकर यह स्पष्ट किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं का भी ध्यान रखती है, जबकि सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का भी नाम चर्चा में था।

महिला कैडर के बारे में सोच: झामुमो ने यह स्पष्ट किया कि पार्टी महिलाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। वर्तमान स्टेट कैबिनेट में सिर्फ एक महिला मंत्री हैं, ऐसे में माजी को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि महिलाओं को भी अवसर मिलते हैं।

ओबीसी वर्ग में पैठ बनाने की कोशिश: माजी ओबीसी वर्ग से आती हैं। झामुमो ने आदिवासी छाप को मिटाने और ओबीसी वर्ग को साधने की कोशिश की है। बीजेपी द्वारा आदित्य साहू को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद, झामुमो ने माजी को उम्मीदवार बनाकर यह संदेश दिया है कि वह भी ओबीसी वर्ग के प्रति सॉफ्ट नेचर रखता है।

सोरेन परिवार से निकटता: माजी सोरेन परिवार की विश्वसनीय मानी जाती हैं। संगठन और व्यक्तिगत रूप से माजी की निकटता सोरेन परिवार से है। इसी वजह से पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है।

 

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