राजस्थान विधानसभा चुनाव के बीच जैसलमेर में वबाल! 50 गांवों के लोगों ने किया बहिष्कार का ऐलान, जानें वजह
राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023 का आगाज हो चुका है। लिहाजा कांग्रेस हो या बीजेपी हर कोई राजनीतिक पार्टी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा में लगी हुई है। हालांकि सरहदी जिले जैसलमेर की विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवारों के पत्ते नहीं खोले हैं। लेकिन उम्मीदवारों की घोषणा से पहले ही जैसलमेर में विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने का मामला सामने आ गया है। यहां 50 गांवों के लोगों ने चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय ले लिया है। इन पच्चास गांवों में करीब 20 से 25 हजार मतदाता है, जो चुनाव का बहिष्कार करने की बात कर रहे हैं, जिसने नेताओं की चिंता बढ़ा दी है।
इस वजह से बहिष्कार की चेतावनी
दरअसल, जैसलमेर के रामगढ़ के निकट स्थित आरएसएमएम के सामने ढुलाई दर बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले 75 दिनों से ट्रक यूनियन की हड़ताल जारी है। हड़ताल के बाद भी कोई समाधान न होने के चलते क्षेत्र के 50 गांवों के लोगों ने ट्रक यूनियन को समर्थन देते हुए विधानसभा चुनाव-2023 का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इस दौरान धरना स्थल पर जुटे क्षेत्र के 50 गांवों के लोगों ने ट्रक मालिकों की वाजिब मांग को नहीं मानने पर नाराजगी जताते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में सर्वसम्मति से वोट नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही जैसलमेर ADM को ज्ञापन सौंपा हैं ।
इस वजह से बहिष्कार की चेतावनी
दरअसल, जैसलमेर के रामगढ़ के निकट स्थित आरएसएमएम के सामने ढुलाई दर बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले 75 दिनों से ट्रक यूनियन की हड़ताल जारी है। हड़ताल के बाद भी कोई समाधान न होने के चलते क्षेत्र के 50 गांवों के लोगों ने ट्रक यूनियन को समर्थन देते हुए विधानसभा चुनाव-2023 का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इस दौरान धरना स्थल पर जुटे क्षेत्र के 50 गांवों के लोगों ने ट्रक मालिकों की वाजिब मांग को नहीं मानने पर नाराजगी जताते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में सर्वसम्मति से वोट नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही जैसलमेर ADM को ज्ञापन सौंपा हैं ।
सुनवाई ना होने से प्रशासन ट्रक मालिक
क्षेत्र वासियों का कहना है कि जब रोजगार ही नहीं बचेगा तो वोट देकर क्या करेंगे? लोगों ने धरना स्थल पर रोजगार नहीं तो वोट नहीं के नारे लगाकर रोष प्रकट किया है। ट्रक मालिकों का कहना है कि ट्रक मालिक पिछले 75 दिन से अपनी दो जून की रोजी-रोटी के लिए संघर्षरत हैं। उनके रोजगार के मुद्दे को ना प्रशासन और ना ही कोई पार्टी सुन रही है।



