दाखिल-खारिज रिवीजन और जमाबंदी से जुड़ी तीन नई सेवाओं की ऑनलाइन शुरुआत, SMS से मिलेगी सूचना
बिहार में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार भूमि विवाद के मामले में होता है। कहा जाता है कि दाखिल-खारिज और जमाबंदी को लेकर कर्मचारी मनमानी करते हैं। इन्हीं सब शिकायतों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार की ओर से तीन नई सेवाओं की शुरुआत की गई है, जिससे लोगों को काफी फायदा होने वाला है। दाखिल-खारिज रिवीजन और जमाबंदी रद्द करने से जुड़े वाद को अब ऑनलाइन दायर किया जा सकेगा। इसकी सूचना किसानों को और जमीन मालिकों को एसएमएस के माध्यम से मिल जाया करेगी। दाखिल-खारिज के विरोध में आने वाले आवेदन का निपटारा भी ऑनलाइन किया जाएगा।

बिहार सरकार की सेवा
बिहार सरकार में राजद कोटे से भूमि सुधार मंत्री आलोक मेहता की ओर से इसकी शुरुआत की गई है। इसमें दाखिल-खारिज के रिवीजन और जमाबंदी से जुड़े मामले को रैयत और किसान ऑनलाइन दायर करेंगे। उन्हें बकायदा इसके अपडेट भी दिए जाएंगे। इसमें ऑनलाइन आपत्तियों को भी दर्ज किया जाएगा। इस सेवा के शुरू होने से सरकार का दावा है कि इन मामलों में लंबित होने की बात क्रमशः खत्म हो जाएगी। इस सेवा से पारदर्शिता भी सामने आएगी। इसके माध्यम से किसानों की समस्या का निदान कम समय में होगा। जमीन मालिक को भूमि कार्यालय और राजस्व कर्मचारी के यहां चक्कर लगाने नहीं पड़ेंगे।
किसानों को फायदा
ध्यान रहे कि इस काम के लिए किसान और रैयत हमेशा कार्यालय का चक्कर लगाते थे। उनसे अवैध उगाही भी की जाती थी। अब वे ऑनलाइन इस काम को कर सकते हैं। इन शिकायतों का निपटारा भी जल्दी किया जाएगा। इसके लिए आवेदक को विभागीय पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा। निबंधन कराने के बाद ही समस्या पर विचार किया जाएगा। जैसे ही कोई रैयत निबंधन कराया है, उसकी समस्या से जुड़ी सभी जानकारी उसकी ओर से दिए गए मोबाइल नंबर पर भेज दी जाएगी।
मंत्री ने दी जानकारी
इस सुविधा का लाभ ये होगा कि जमीन के मालिक को ये जानकारी मिल जाएगी कि जमाबंदी के प्लाट के मालिकाना हक और रकबा में कोई बदलाव हुआ है या नहीं? इसके अलावा भविष्य में इस सेवा के तहत भूमि स्वामित्व का प्रमाण पत्र, लगान और राजस्व कोर्ट में दायर वाद से संबंधित सूचना भी समय-समय पर दी जाएगी। मंत्री आलोक मेहता ने मीडिया से बातचीत में ये बताया है कि दाखिल-खारिज के विरुद्ध ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करने की पहले व्यवस्था नहीं की गई थी। नीतीश सरकार में इस व्यवस्था को लागू किया गया है। पहले किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।



