थम गया दुनिया का इंजन, निकल गए कलपुर्जे… चीन से आ रहे डराने वाले संकेत
चीन को दुनिया की फैक्ट्री माना जाता है। इसकी वजह यह है कि पूरी दुनिया चीन में बने माल से पटी पड़ी है। दो दशक से अधिक समय तक दुनियाभर की कंपनियों में चीन में सस्ते में सामान बनाया और इसे पूरी दुनिया में बेचा। इसके दम पर चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बन गया। लेकिन हाल के दिनों में चीन से एक के बाद एक कई डराने वाली खबरें आई हैं। देश की इकॉनमी सुस्त पड़ गई है, एक्सपोर्ट गिर गया है, मैन्यूफैक्चरिंग का दम निकल गया है, कीमतों में गिरावट आई है और दुनियाभर की कंपनियों ने मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। खुद चीन के लोग आशंकित हैं। पैसे खर्च करने के बजाय वे पैसा बचाने में लगे हैं। समझिए इन संकेतों में…
चीन में बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है। हालत यह हो गई है कि चीन की सरकार ने युवाओं की बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े जारी करना बंद कर दिया है। इसे चीन की आर्थिक मंदी के अहम संकेत के रूप में देखा जा रहा था। जून में चीन के शहरी क्षेत्रों में 16 से 24 साल के युवाओं के लिए बेरोजगारी दर 20 परसेंट से अधिक की रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। चीन में बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े जारी करने वाली संस्था एनबीएस ने कहा है कि इस महीने अब बेरोजगारी डेटा को जारी नहीं करेगा। उसका कहना है कि वह इस बात पर फिर से विचार करेगा कि बेरोजगारी दर को किस तरह से मापा जाए।
करीब तीन साल से चीन ने कोरोना से निपटने के लिए सख्त पाबंदी लगा रखी थी। इससे कंज्यूमर स्पेंडिंग में गिरावट आई। 2022 के अंत में जब पाबंदियां हटाई गईं तो लाखों लोगों ने रेस्टोरेंट्स और शॉपिंग मॉल्स का रुख किया और छुट्टियां मनाने चले गए। लेकिन यह जोश कुछ ही दिन में ठंडा पड़ गया। रिकवरी पटरी से उतर गई और लेबर मार्केट दबाव में आ गया। कंज्यूमर डिमांड में कमी के कारण कंपनियां लोगों को नौकरी नहीं दे रही हैं और इकनॉमिक स्थिति के कारण लोग खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं। देश में हाउसहोल्ड डिपॉजिट 1.7 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है जो एक दशक में इसका सबसे बड़ा एक्सपेंशन है।




