‘पिता की तरह IAS बनने का सपना था’ लंदन में मलाईदार नौकरी छोड़ बेटी ने क्रैक किया कलेक्ट्री का इम्तिहान!
हरि चंदना दसारी की आईएएस बनने की कहानी जबर्दस्त है। उन्होंने 2010 में दूसरे प्रयास में कलेक्ट्री के इम्तिहान में सफलता हासिल की थी। चंदना ने लंदन में बेहद अच्छी नौकरी छोड़कर आईएएस बनने का फैसला किया था। वह लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से पढ़ी हैं। चंदना हमेशा अपने पिता की तरह आईएएस बनाना चाहती थीं। यह इच्छा तब भी बनी रही जब वह लंदन में पढ़ाई के बाद जॉब करने लगीं। आज चंदना लाखों-लाख लड़कियों के लिए इंस्पिरेशन हैं।
तेलंगाना के 2010 बैच की आईएएस अधिकारी हरि चंदना दसारी ने सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी है। समाज के हाशिए पर मौजूद वर्गों के उत्थान के लिए उनके अथक प्रयासों ने प्रशंसा अर्जित की है। लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए उन्हें प्रधानमंत्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। हैदराबाद की ज्वाइंट कलेक्टर सहित विभिन्न भूमिकाओं में उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा है।
दूसरे प्रयास में क्रैक किया UPSC
एक आईएएस अधिकारी के रूप में समाज कल्याण के प्रति अपने पिता की अटूट प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर हरि चंदना ने भी इसी रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। उनका यह संकल्प 2010 में सफल हुआ। उसी साल उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में अपने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की थी। उन्हें तेलंगाना राज्य कैडर (आईएएस 2010 बैच) आवंटित हुआ था।
लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में पढ़ीं
इसके बाद चंदना आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चली गईं। प्रसिद्ध लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से उन्होंने पर्यावरण अर्थशास्त्र में MSc की। पढ़ाई पूरी करने के बाद चंदना ने प्रोफेशनल वर्ल्ड में कदम रखा। उन्होंने लंदन में विश्व बैंक और बीपी शेल के साथ काम किया।




