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‘भाई चिट्टा मिलेगा क्या’, हिमाचल में हर कोई यही पूछ रहा है! सोने से भी महंगा क्या है ये जहरीला जानलेवा नशा?

हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ महीनों में एक के बाद एक कई मौत के मामले सामने आए हैं और मौत की वजह है ड्रग्स। नशे की लत इस कदर युवाओं को घेर चुकी है कि वो मौत से भी नहीं डर रहे। हर किसी की जुबां पर बस यहीं शब्द हैं- क्या ‘चिट्टा’ मिलेगा? क्या है ये चिट्टा जो लोगों की जान ले रहा है, लेकिन यंगस्टर्स इसके लिए पागल हो रहे हैं। स्कूल, कॉलेज के युवा हो या फिर नौकरीपेशा हर किसी को इस ड्रग की लत लग गई है।

‘चिट्टा’ की चपेट में हिमाचल प्रदेश

अब तक ड्रग्स का काला कारोबार पंजाब तक ही सीमित था, लेकिन अब ड्रग तस्करी हिमाचल प्रदेश में भी धड़ल्ले से हो रही है। पंजाब के बाद अब हिमाचल के युवा ड्रग तस्करों के निशाने पर हैं। छोटे-छोटे लेवल पर ड्रग्स बेची जा रही है, लेकिन यहां पर सबसे ज्यादा जिस ड्रग की डिमांड है वो है चिट्टा। सबसे पहले जान लीजिए ये चिट्टा होता क्या है। दरअसल हेरोइन को ही लोकल भाषा में यहां के लोग चिट्टा बोलते हैं। चिट्टा मतलब सफेद। हेरोइन सफेद रंग की एक ड्रग होती है जिसकी कीमत सोने की कीमत से भी ज्यादा होती है।

सोने से महंगा है ये ‘चिट्टा’

हेरोइन के एक किलो की कीमत करीब 5 करोड़ रुपये होती है। इसका नशा भी बेहद खतरनाक होता है। सारी ड्रग्स में चिट्टा को सबसे ज्यादा स्ट्रांग माना जाता है। इसका नशा सीधा दिमाग पर असर करता है। अगर डोज थोड़ा सा भी ज्यादा हो जाए तो जान भी जा सकती है। इसे लेने वाले को इसकी लत पड़ने लगती है। इसे सफेद जहर कहा जाए तो कुछ भी गलत नहीं होगा। चिट्टा या हेरोइन की तस्करी पाकिस्तान और अफगानिस्तान से पंजाब तक हो रही थी। अब यही ड्रग डीलर्स इसे हिमाचल तक भी पहुंचा रहे हैं।

चौंकाने वाले है ड्रग्स से जुड़े डाटा

एक डाटा के मुताबिक पिछले 180 दिनों में सिर्फ हिमाचल में ही 50 करोड़ रुपया का चिट्टा जब्त हुआ है। 1 जनवरी से लेकर 30 जून तक के डाटा के मुताबिक हिमाचल पुलिस ने 8 किलो 600 ग्राम चिट्टा जब्त किया है। 1230 लोगों के खिलाफ ड्रग्स मामले में केस दर्ज किए गए हैं जबकि कुल 1670 लोग गिरफ्तार भी हुए हैं। इन डाटा से साफ है कि अब हिमाचल भी ड्रग्स की चपेट में पूरी तरह से आ चुका है।

बहुत जल्दी पड़ जाती है ‘चिट्टा’ की लत

दरअसल ड्रग डीलर्स के लिए ये कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है और ये स्कूल कॉलेज के बच्चों को टारगेट कर रहे हैं। पहले शौक-शौक में बच्चे एक दूसरे को देखकर इस ड्रग को यूज करते, लेकिन धीरे-धीरे कब उन्हें इस ड्रग की लत पड़ जाती है ये उन्हें भी पता नहीं चलता। इसके बाद वो कभी चोरी करके, तो घरवालों से पढ़ाई के नाम पर पैसा मांगकर ये ड्रग्स खरीदते हैं और बस इसी का इंतजार होता है इन ड्रग तस्करों को।

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