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भारत की मदद से प्रधानमंत्री बना… नेपाली पीएम प्रचंड ने विपक्ष के आगे घुटने टेके, संसद में मांगी माफी

नेपाल में भारतीय व्‍यवसायी प्रीतम सिंह को लेकर दिए बयान पर बुरी तरह से घिरे प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल ने माफी मांग ली है। कई दिनों से विपक्षी दलों के हमले के बाद नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड ने संसद के अंदर माफी मांगी। इससे पहले गत 2 जुलाई को प्रचंड ने एक कार्यक्रम में कहा था कि प्रीतम सिंह ने एक बार मुझे प्रधानमंत्री बनाने में मदद की थी। मुझे प्रधानमंत्री बनाने के लिए प्रीतम सिंह कई बार दिल्‍ली गए थे और काठमांडू में नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की थी। प्रचंड के इस बयान के बाद देश में सियासी बवाल मच गया था और केपी ओली की पार्टी लेकर सत्‍तारूढ़ गठबंधन में शामिल नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने इसकी आलोचना की थी।

ओली की पार्टी संसद में कई दिनों से प्रचंड के इस्‍तीफे की मांग कर रही थी और इसकी वजह से पिछले दिनों कार्यवाही को स्‍थगित करना पड़ा था। इस सियासी विवाद के बाद अब प्रचंड ने एक बयान देकर माफी मांगा है। प्रचंड ने प्रतिनिधि सभा में कहा, ‘हालांकि यह मेरा इरादा नहीं था (यह कहना कि नेपाल में प्रधानमंत्रियों की नियुक्‍त करने में भारत की कोई भूमिका है), इसके बाद भी मैं अपने बयान के लिए खेद व्‍य‍क्‍त करता हूं।’

प्रचंड को याद आई बेटी, ओली की पार्टी को सुना दिया

प्रचंड ने अपने भाषण में कहा कि वह कार्यक्रम के दौरान भावुक हो गए थे और उस समय प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि एक बेटी के पिता के रूप में बोल रहे थे। मेरी बेटी की एक समय में बहुत तबीयत खराब थी और सरदार प्रीतम सिंह ने मदद की थी। दहल की बेटी ज्ञानू केसी का साल 2014 में कैंसर से निधन हो गया था। प्रीतम सिंह ने भारत में ज्ञानू के इलाज में मदद की थी। प्रचंड ने कहा कि उन्‍हें बाद में यह अहसास हुआ कि उनका बयान एक देश के प्रधानमंत्री होने के नाते अनुचित था।नेपाली प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गलत है कि ओली की पार्टी यूएमएल और उसके सांसदों ने यह आरोप लगाना शुरू कर दिया कि भारत की उन्‍हें प्रधानमंत्री बनाने में भूमिका है। यही नहीं यूएमएल ने तो उनके इस्‍तीफ तक की मांग कर डाली। प्रचंड ने सवाल किया, ‘प्रीतम सिंह को लेकर मेरे बयान की भाषा अनुचित हो सकती है लेकिन कोई पूरी संसद की निष्‍ठा को लेकर सवाल कैसे खड़ा सकता है जिसने मेरा चुनाव किया है।’ इससे पहले ओली, प्रचंड और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के बीच बैठक हुई थी और इसमें सहमति बनी थी कि गतिरोध को खत्‍म करने के लिए प्रधानमंत्री मांगेंगे।

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