महाशिवरात्रि का पर्व आज है, कहां-कहां रहेंगे मौजूद पंच केदार, क्या है उनकी मान्यता जानें!

महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 18 फरवरी को मनाई जाती है. इस दिन भोले के भक्त उन्हें खुश करने के लिए बड़ी संख्या में शिवालय में पहुंचते हैं. जब-जब शिव के प्रिय स्थानों की बात होती हैं. तब-तब हिमालय की गोद में बसे देव भूमि उत्तराखंड की बात होती है. कहा जाता है कि उत्तराखंड के कोने-कोने में देवता विराजते हैं. यहां बाबा केदारनाथ के अलावा भी कई शिवालय हैं. जो प्रमुख केंद्र धार्मिक मान्यताओं के हैं. गढ़वाल इलाके में स्थापित पंच पास मंदिरों में भगवान के अलग-अलग रंगों की पूजा अर्चना होती है जो मिलकर पंच केदार कहलाते हैं. नेपाल के पशुपतिनाथ समेत पंच केदार की यात्रा के बाद ही द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक केदारनाथ के पूजा पूर्णता प्राप्त करती हैं.
मद्महेश्वर तुंग ईश्वर, रुद कल्प महेश्वरम । पंच धन्य विशाल आलय,जय केदार नमाम्यहम… दरअसल पंचकेदार पांच शिव मंदिरों का सामूहिक नाम है और इसका वर्णन स्कंद पुराण के केदारखंड में वर्णित है. पंचकेदार में पहले केदार के रूप केदारनाथ मंदिर है. द्वितीय केदार के रूप में भगवान मदमहेश्वर, तृतीय केदार के रूप में भगवान तुंगनाथ, चतुर्थ केदार के रूप में भगवान रुद्रनाथ और पांचवे केदार के रूप में कल्पेश्वर की पूजा होती है. सभी पंचकेदार भगवान शिव के पवित्र स्थान हैं, जहां भगवान शंकर के विभिन्न विग्रहों की पूजा होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचकेदार की मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने गुरु, कुल, ब्राह्मणों और भ्रातृहत्या (भाइयों की हत्या) के पाप से मुक्ति पाना चाहते थे. इसके लिए वे भगवान शंकर का आशीर्वाद पाना चाहते थे.



