सफेद पर्ची = 3 से 5 लाख, पीली=5 से 50 लाख…कारोबारियों से जबरन वसूली के लिए कलर कोड का इस्तेमाल करता था अतीक अहमद
उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर से नेता अतीक अहमद की आय को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। 15 अप्रैल की रात करीब 10:35 बजे अतीक और उसके भाई अशरफ को मेडिकल जांच के लिए ले जाए जाने के दौरान कॉल्विन हॉस्पिटल में हत्या कर दी गई। इसके बाद से माफिया के कई राज सामने आ रहे हैं। ताजा मामला उसके इलेक्शन टैक्स का सामने आया है। माफिया की आय का सबसे बड़ा स्रोत इलेक्शन टैक्स के नाम पर जबरन वसूली और जमीन हड़पना था। पिछले दिनों बिल्डर मोहम्मद मुस्लिम का चैट वायरल होने के बाद इस प्रकार के मामले सामने आने लगे हैं। कई लोग अब अतीक के इस चुनावी टैक्स के जरिए अवैध वसूली की बात को स्वीकार कर रहे हैं। अतीक की इलेक्शन टैक्स पर्ची को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दावा किया जा रहा है कि जिले के लगभग सभी संपन्न लोगों के पास यह पर्ची भेजी जाती थी। सूत्रों का कहना है कि पीली पर्चियां अस्पतालों, कारखानों और बड़े खुदरा शोरूम के मालिकों को भेजी जाती थीं।
प्रयागराज और आसपास के जिलों में कारोबार करने वालों को अतीक अपने निशाने पर रखता था। इसको लेकर कई लोग अब सोशल मीडिया पर भी अपने साथ हुई वसूली का विवरण साझा कर रहे हैं। अतीक अहमद के बैंक खाते किए गए भुगतान संबंधित जमा पर्ची को साझा किया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि पूर्व विधायक और सांसद की इलेक्शन टैक्स पर्ची भेजकर वसूली करता था। पर्ची के रंगों का अर्थ अलग-अलग होता था। मतलब, जिस रंग की पर्ची, उतना पैसा देना कारोबारियों को देना पड़ता था। अगर किसी को सफेद पर्ची मिलती थी, इसका मतलब उसे 3 से 5 लाख रुपए तक इलेक्शन टैक्स के रूप में जमा कराना पड़ता था। एक पीली पर्ची के लिए प्राप्तकर्ता को 5 लाख रुपए से 50 लाख रुपए के बीच भुगतान करना होता था।
चुनावी खर्च के लिए बाहुबल का प्रयोग
अतीक अहमद ने 1989 में पहली बार विधायकी जीती। इसके साथ पांच बार का विधायक और एक बार का फूलपुर से सांसद अतीक अपने चुनावी खर्च के नाम पर लोगों से खूब उगाही करता था। इलेक्शन वार चेस्ट में पैसा लाने के लिए वह बाहुबल का इस्तेमाल करता था। कई खाते इस बात की तस्दीक करते हैं कि अतीक और उसके गुर्गे चुनाव को लेकर महीनों पहले जबरन वसूली की रणनीति बनाना शुरू कर दते थे। 1989 से 2002 तक इलाहाबाद पश्चिमी सीट से विधानसभा चुनाव और वर्ष 2004 में फूलपुर से लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उसने पैसा और बाहुबल का खूब इस्तेमाल किया। ये उसके राजनीतिक दबदबे को प्रदर्शित करते थे।




