झारखंड सरकार ने JPSC और JSSC की परीक्षाओं में सुधार के लिए एक विशेष कमेटी बनाने का फैसला किया था। इस कमेटी की अध्यक्षता आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल को करनी थी। कमेटी को परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और गड़बड़ियों को रोकने के सुझाव देने थे। इसके लिए सरकार ने दो महीने का समय निर्धारित किया था। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कमेटी का गठन नहीं हो पाया है। इस स्थिति में परीक्षा सुधार की योजना आगे नहीं बढ़ सकी है। राज्य में दोनों आयोगों की परीक्षाओं में गड़बड़ी और फर्जी नियुक्तियों के मामले सामने आए थे। इसके विरोध में अभ्यर्थियों ने कई बार प्रदर्शन भी किया था। इन घटनाओं के बाद सरकार ने 18 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी किया था। यह आदेश कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से जारी किया गया था। आदेश के तहत कुल 45 परीक्षाओं को प्रभावित माना गया था। इनमें से 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया था। छह परीक्षाओं को स्थगित किया गया था। वहीं, 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया था। इसी दिन सरकार ने अधिसूचना संख्या 5409 जारी कर परीक्षा सुधार कमेटी बनाने का निर्णय भी लिया था।
प्रस्तावित कमेटी में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाना था। इसके साथ ही प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों को भी सदस्य बनाने की योजना थी। कमेटी को JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी थी। उसे दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी। रिपोर्ट में परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने के सुझाव दिए जाने थे। हालांकि, निर्धारित अवधि गुजर जाने के बावजूद सरकार ने कमेटी गठित नहीं की है। दूसरी ओर, JPSC की 14वीं परीक्षा और JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की CID जांच जारी है। इन मामलों में अब तक कम से कम 50 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। गिरफ्तार लोगों में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते भी शामिल हैं। परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कई सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हुई है। JPSC मामले में जांच एजेंसी दो चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। ऐसे में परीक्षा सुधार के लिए घोषित कमेटी का गठन नहीं होना सवाल खड़े कर रहा है।



