झारखंड के माओवाद प्रभावित इलाकों में लंबे समय से तैनात पुलिसकर्मियों के तबादले का मुद्दा फिर चर्चा में है। पुलिस मुख्यालय की ओर से वर्षों पहले स्थानांतरण नीति तैयार की गई थी। इसके बावजूद कई सिपाही, हवलदार और एएसआइ लंबे समय से एक ही जिले या इकाई में तैनात हैं। खासकर संवेदनशील और जंगल वाले क्षेत्रों में लंबे समय से पदस्थापित जवानों को अब तक राहत नहीं मिली है। पूर्व डीजीपी के कार्यकाल में इस व्यवस्था को लागू करने की पहल हुई थी। इसका उद्देश्य लंबे समय से कठिन इलाकों में काम कर रहे पुलिसकर्मियों को रोटेशन का लाभ देना था। प्रस्ताव के अनुसार माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में अधिकतम चार साल तक तैनाती का प्रावधान था। वहीं अन्य जिलों में पुलिसकर्मियों को अधिकतम दस साल तक रखने की योजना थी। व्यवस्था का उद्देश्य जवानों पर काम के दबाव को कम करना था। साथ ही उनकी कार्यक्षमता और जीवनशैली में सुधार लाना भी इसका मकसद था।
इस नीति की समीक्षा और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पुलिस मुख्यालय स्तर पर समिति बनाने की पहल भी हुई थी। हालांकि, यह व्यवस्था पूरी तरह जमीन पर लागू नहीं हो सकी। पुलिस अधिकारियों के तबादले समय-समय पर होते रहे हैं। लेकिन निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को स्थानांतरण नीति का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। कई जवान वर्षों से संवेदनशील जिलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, गढ़वा और पलामू जैसे जिलों में यह समस्या प्रमुख रूप से सामने आती रही है। पुलिस संगठनों ने भी लंबे समय से इस विषय को उठाया है। झारखंड पुलिस एसोसिएशन और झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन ने कई बार मांग रखी है। दोनों संगठनों ने पुलिस मुख्यालय और डीजीपी के सामने जवानों के तबादले का मुद्दा उठाया है। संगठनों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में लंबे समय तक तैनाती से जवानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
हाल में एक विवाद के बाद पुलिस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के सामने नौ सूत्री मांगें रखी थीं। इन मांगों में लंबे समय से एक ही जिले और इकाई में तैनात पुलिसकर्मियों के तबादले की मांग भी शामिल थी। एसोसिएशन ने माओवाद प्रभावित जिलों में लंबे समय से तैनात जवानों का पदस्थापन बदलने की मांग की है। संगठन ने करीब दस वर्षों से इन क्षेत्रों में तैनात पुलिसकर्मियों के मामले पर विशेष ध्यान देने को कहा है। अपनी मांगों को लेकर पुलिस एसोसिएशन ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा भी की है। आंदोलन के दूसरे दिन संयुक्त सचिव राकेश कुमार पांडेय ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया। उन्होंने मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने की अपील की। एसोसिएशन का कहना है कि लंबे समय तक एक ही संवेदनशील क्षेत्र में ड्यूटी से मानसिक और कार्य संबंधी दबाव बढ़ता है। संगठन के अनुसार स्थानांतरण नीति लागू होने से जवानों को नियमित रोटेशन मिल सकेगा। अब पुलिसकर्मियों की इस पुरानी मांग पर सरकार के अगले कदम का इंतजार है।



