Ranchi: रिम्स में आठ साल की बच्ची की दुर्लभ जन्मजात बीमारी की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। बच्ची ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी नाम की बीमारी से पीड़ित थी। इस बीमारी में मूत्राशय सामान्य तरीके से शरीर के अंदर विकसित नहीं होता है। इसके कारण मूत्राशय निचले पेट की दीवार के बाहर खुला रहता है। बच्ची की सर्जरी करीब सात घंटे तक चली। ऑपरेशन में कई विभागों के डॉक्टरों की टीम ने मिलकर काम किया। सर्जरी के दौरान बच्ची के मूत्राशय और पेट के निचले हिस्से का पुनर्निर्माण किया गया। इसके बाद प्रभावित हिस्से को सही स्थिति में लाकर बंद किया गया। जटिल प्रक्रिया के बावजूद डॉक्टरों ने ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। सर्जरी के बाद बच्ची की हालत में सुधार बताया गया है। अब बच्ची पेशाब की sensation महसूस कर पा रही है।
ऑपरेशन के बाद बच्ची को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। फिलहाल उसके पेट का घाव पूरी तरह बंद हो गया है। घाव अच्छी तरह से ठीक भी हो रहा है। हालांकि बच्ची को कभी-कभी urine leakage की समस्या हो रही है। डॉक्टर इस समस्या पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी मानी जाती है। इसमें मूत्राशय, पेट की दीवार और पेल्विक हिस्से के पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ती है। सर्जरी का मुख्य उद्देश्य इन हिस्सों को दोबारा सही स्थिति में लाना होता है। रिम्स में इस प्रक्रिया के लिए जरूरी ज्यादातर सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। डॉक्टरों ने अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल के साथ पूरी सर्जरी की। इस तरह के मामलों में विशेषज्ञ टीम के समन्वय को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है।
रिम्स के अनुसार बच्ची को आगे भी चिकित्सकों की निगरानी में रखा जाएगा। आने वाले समय में उसके पेशाब पर नियंत्रण की नियमित जांच की जाएगी। ब्लैडर की स्थिति की भी लगातार निगरानी होगी। डॉक्टर बच्ची की किडनी की स्थिति पर भी नजर रखेंगे। इसके साथ ही उसके शारीरिक विकास की नियमित जांच की जाएगी। इलाज के दौरान किसी भी समस्या की पहचान समय पर करने का प्रयास होगा। डॉक्टरों की टीम बच्ची की स्थिति के अनुसार आगे का उपचार तय करेगी। रिम्स में हुई यह सर्जरी संस्थान की विशेषज्ञ सेवाओं को दर्शाती है। इसमें अलग-अलग विभागों के डॉक्टरों के बीच समन्वय की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। दुर्लभ बीमारी से जूझ रही बच्ची के सफल ऑपरेशन से परिवार को राहत मिली है। रिम्स में इस तरह के जटिल मामलों के उपचार की क्षमता का यह एक उदाहरण है।



