सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए से जुड़े एक अहम मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रफुल्ल मालाकार को दी गई जमानत को बरकरार रखा है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ ने की। एनआईए ने जमानत आदेश को चुनौती दी थी। एजेंसी का कहना था कि आरोपी को राहत नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। इससे हाईकोर्ट के निर्णय को मजबूती मिली है। कानूनी हलकों में इस फैसले की चर्चा हो रही है।
प्रतिवादी की ओर से वकील मनोज टंडन ने दलील दी। उन्होंने कहा कि आरोपी लंबे समय से जेल में है। उसे 15 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। यह सजा रांची की विशेष अदालत ने दी थी। आरोपी पहले ही कई साल जेल में बिता चुका है। ऐसे में जमानत देना उचित है। कोर्ट ने इस दलील को गंभीरता से सुना। इसके बाद एनआईए की एसएलपी खारिज कर दी गई। इस फैसले से आरोपी को राहत मिली है। वकील ने इसे न्याय की जीत बताया।
यह मामला वर्ष 2012 से जुड़ा हुआ है। प्रफुल्ल मालाकार को दानापुर से गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि उसे समय पर कोर्ट में पेश नहीं किया गया। उसके परिवार ने इस पर आपत्ति जताई थी। बाद में पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया। पुलिस ने कहा कि वह हथियार के साथ पकड़ा गया था। इस मामले की सुनवाई एनआईए कोर्ट में हुई थी। कोर्ट ने उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने बाद में जमानत दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले को सही माना है।



