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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, झारखंड स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे प्रश्न.

बर्न यूनिट अभाव को कोर्ट ने संवैधानिक अधिकार उल्लंघन माना.

झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग अग्निकांड मामले में अहम फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता जताई। चीफ जस्टिस एमएस सोनक की खंडपीठ ने आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि बर्न मरीजों के इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यह स्थिति नागरिकों के जीवन के अधिकार के खिलाफ है। सरकारी अस्पतालों में आधुनिक बर्न यूनिट की भारी कमी बताई गई। मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। अदालत ने स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने की जरूरत बताई। राज्य सरकार से जवाब मांगा गया। कोर्ट ने व्यवस्था को गंभीर मुद्दा बताया।

सुनवाई में मेडिकल कॉलेजों की वास्तविक स्थिति सामने आई। कई अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी पाई गई। कुछ जगह स्टाफ मौजूद लेकिन विशेषज्ञ नहीं हैं। कहीं इलाज की सुविधा अधूरी है। अदालत ने इसे सिस्टम की बड़ी विफलता बताया। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने कहा कि राज्य नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है। जिम्मेदारी निभाने में असफलता पर मुआवजा देना होगा। सरकार को सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया गया। अदालत ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।

मामला वर्ष 2021 के दर्दनाक अग्निकांड से जुड़ा है। आरोप था कि पीडीएस केरोसिन मिलावटी और ज्यादा ज्वलनशील था। लैब रिपोर्ट में फ्लैश पॉइंट 13.5 डिग्री पाया गया। यह तय मानक से काफी कम था। हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी। एक मासूम बच्चा भी जान गंवा बैठा था। लगभग 15 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। कई पीड़ित स्थायी रूप से विकृत हो गए। याचिका में अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं होने की बात कही गई। मरीजों को सामान्य वार्ड में रखने का आरोप भी लगा।

 

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