झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों में है। माध्यमिक आचार्य परीक्षा 2025 के अभ्यर्थी परेशान हैं। प्रवेश पत्र समय पर जारी नहीं किए गए। इसके कारण कई अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। अभ्यर्थियों का कहना है कि गलती उनकी नहीं थी। आयोग की तकनीकी खामी जिम्मेदार है। इस लापरवाही से उनका भविष्य प्रभावित हुआ है। कई छात्रों ने इसे अन्याय बताया है। इसी कारण उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामला अब कानूनी रूप ले चुका है।
हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया है कि सभी आवेदन समय पर किए गए थे। पात्रता शर्तों का भी पूरी तरह पालन किया गया। इसके बावजूद प्रवेश पत्र डाउनलोड नहीं हो सका। आयोग द्वारा शुरू की गई नई व्यवस्था कारगर साबित नहीं हुई। न कोई सूचना मिली और न कोई सहायता। अभ्यर्थियों को अंतिम समय तक इंतजार करना पड़ा। कई लोग परीक्षा केंद्र तक भी नहीं पहुंच सके। इससे उनकी मेहनत बेकार चली गई। आयोग की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं।
अभ्यर्थियों ने कोर्ट से परीक्षा दोबारा कराने की मांग की है। उन्होंने निष्पक्ष प्रक्रिया की अपील की है। साथ ही पेपर-2 में शामिल होने का अवसर मांगा गया है। उनका कहना है कि प्रशासनिक गलती का खामियाजा छात्र क्यों भुगतें। यह मामला शिक्षा और भर्ती व्यवस्था से जुड़ा है। कोर्ट का फैसला मिसाल बन सकता है। आयोग की जवाबदेही तय होने की उम्मीद है। छात्रों में न्याय की आस बनी हुई है। पूरे राज्य की नजर इस मामले पर है।



