JharkhandStates

रॉयल्टी बकाया पर हाईकोर्ट सख्त, खनन पट्टा रद्द सही.

झारखंड हाईकोर्ट ने पत्थर खनन मामले में याचिका खारिज.

झारखंड हाईकोर्ट ने पत्थर खनन पट्टे से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ता आनंद कुमार सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रॉयल्टी का भुगतान न करना गंभीर उल्लंघन है। यह मामला पलामू जिले के चपरवार मौजा का है। खनन पट्टा वर्ष 2014 में दिया गया था। इसकी अवधि दस वर्षों की थी। याचिकाकर्ता के पास पर्यावरण स्वीकृति थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति भी मौजूद थी। इसके बावजूद रॉयल्टी भुगतान नहीं हुआ। अदालत ने इसे लापरवाही माना।

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 2016 से 2019 तक रॉयल्टी बकाया रही। जिला खनन पदाधिकारी ने 30 दिन का नोटिस जारी किया था। नोटिस के बाद भी राशि जमा नहीं की गई। इसके बाद पलामू उपायुक्त ने पट्टा समाप्त करने की स्वीकृति दी। 8 फरवरी 2020 को इसकी सूचना दी गई। याचिकाकर्ता ने इस फैसले को चुनौती दी। उनका कहना था कि कोई औपचारिक आदेश नहीं हुआ। उन्होंने प्राकृतिक न्याय का हवाला दिया। अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

खंडपीठ ने कहा कि बकाया रॉयल्टी एक स्वीकृत तथ्य है। ऐसे में मामला वापस भेजना केवल औपचारिकता होगी। अदालत ने कहा कि नियमों के तहत उपायुक्त को अधिकार प्राप्त है। खान आयुक्त द्वारा पुनरीक्षण याचिका खारिज करना सही ठहराया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक न्याय का सहारा नहीं लिया जा सकता। याचिका को निराधार बताया गया। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से खनन नियमों की सख्ती साफ हुई। सरकार के निर्णय को कानूनी समर्थन मिला।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button