गोद लेने की प्रक्रिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
लोहरदगा, झारखंड: झारखंड के लोहरदगा जिले में एक नवजात बच्चे को लावारिस छोड़े जाने की हालिया घटना ने गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया के बारे में लोगों में जागरूकता की कमी को उजागर किया है।
यह दुखद घटना समाज में ऐसे बच्चों के भविष्य और उनके सुरक्षित पालन-पोषण के लिए गंभीर चिंताएं पैदा करती है।
लोहरदगा की यह घटना इसी बड़ी समस्या का एक छोटा सा हिस्सा है। अक्सर, लोग बच्चे को पालने में असमर्थ होने पर, या सामाजिक कलंक के डर से उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं, बजाय इसके कि वे कानूनी और सुरक्षित तरीके से गोद लेने की प्रक्रिया का सहारा लें। इस तरह के परित्याग न केवल बच्चे के जीवन को खतरे में डालते हैं, बल्कि उन्हें भविष्य में शोषण के प्रति भी संवेदनशील बनाते हैं।
इस घटना ने अधिकारियों और सामाजिक संगठनों को गोद लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने और इसके बारे में व्यापक जागरूकता फैलाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है। यह आवश्यक है कि लोगों को यह बताया जाए कि बच्चे को लावारिस छोड़ने के बजाय, गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उसे एक सुरक्षित और प्यार भरा घर मिल सकता है। सरकारों और स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलकर काम करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक बच्चे को गरिमा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिले।



