झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में एक बड़ा मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य गवाह सिद्धार्थ सिंघानिया ने अदालत में बयान दर्ज कराया है। यह बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज हुआ। बयान में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सिंघानिया ने बताया कि झारखंड में शराब नीति जानबूझकर बदली गई। इसके पीछे छत्तीसगढ़ के मॉडल को आधार बनाया गया। यह मॉडल पहले से विवादों में रहा है। अदालत में दिए गए बयान से प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। मामला अब और गंभीर होता दिख रहा है।
सिद्धार्थ सिंघानिया के अनुसार, इस पूरे सिस्टम की योजना पहले से बनाई गई थी। छत्तीसगढ़ के कुछ प्रभावशाली लोगों को इसमें शामिल किया गया। तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे की भूमिका अहम बताई गई है। JSBCL में कंसल्टेंट की नियुक्ति भी रणनीति का हिस्सा थी। टेंडर की शर्तों में बदलाव कर सीमित कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं बताई गई है। अदालत को बताया गया कि नीति निर्माण में नियमों की अनदेखी हुई। शराब कारोबार पर निजी सिंडिकेट का नियंत्रण स्थापित किया गया। इससे सरकारी व्यवस्था कमजोर हुई। पूरे सिस्टम को सुनियोजित तरीके से चलाया गया।
बयान में वित्तीय लेनदेन का भी जिक्र है। अवैध कमीशन की बात खुलकर सामने आई है। प्रति पेटी शराब पर मोटी रकम वसूली गई। बिना टैक्स वाली शराब सरकारी दुकानों से बेची गई। कर्मचारियों की नियुक्ति निजी एजेंसियों से कराई गई। इससे पूरे नेटवर्क पर पकड़ बनाई गई। होलोग्राम का काम भी एक ही कंपनी को दिया गया। गवाह के अनुसार, यह सब उच्च स्तर की मंजूरी से हुआ। जांच एजेंसियों के लिए यह बयान अहम माना जा रहा है। आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर है।



