झारखंड में शराब घोटाले का मामला धीरे-धीरे बड़ा रूप ले रहा है और अब ईडी ने जांच की गति बढ़ा दी है। मंगलवार को ईडी टीम ने होटवार जेल पहुंचकर उन पांच आरोपियों से पूछताछ की जिन्हें एसीबी ने पहले गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों की भूमिका फर्जी बैंक गारंटी उपलब्ध कराने और सरकारी व्यवस्था को वित्तीय नुकसान पहुंचाने में अहम मानी जा रही है। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और नेटवर्क से जुड़े सवाल पूछे।
ईडी द्वारा कोर्ट में दिए गए आवेदन में साफ कहा गया था कि फर्जी बैंक गारंटी के सहारे करोड़ों रुपये की शराब खरीद और वितरण कराया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित कंपनियों के निदेशक वित्तीय अनियमितताओं में सीधे तौर पर शामिल थे। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में सरकारी पदों पर बैठे लोगों की क्या भूमिका थी।
इस मामले में पहले ही कई वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। आरोप है कि इस घोटाले में प्रशासनिक स्तर पर गहरी मिलीभगत रही। अब जब ईडी ने पूछताछ शुरू कर दी है, तो माना जा रहा है कि कुछ बड़े नाम जल्द सामने आ सकते हैं। यह मामला झारखंड के प्रशासनिक ढांचे की कार्यशैली पर गहरे सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और स्पष्ट होगी।



