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मां की स्वीकारोक्ति बाद डीएनए जांच कराना अपमानजनक माना गया।
कटक, ओडिशा: ओडिशा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जब कोई माँ बच्चे की पितृत्व स्वीकार कर लेती है.
तो भी डीएनए टेस्ट के लिए मजबूर करना मातृत्व का अपमान है। कोर्ट का यह फैसला उन महिलाओं को सम्मान और गरिमा प्रदान करता है जो कानूनी विवादों में फँस जाती हैं।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में डीएनए टेस्ट का आदेश देना एक माँ की गवाही और उसकी गरिमा को कम आँकने के बराबर होगा। यह फैसला इस बात पर जोर देता है कि माँ के बयान को सम्मान दिया जाना चाहिए, खासकर जब बच्चे की पहचान का मामला हो।
यह फैसला भारत में न्यायिक प्रणाली में महिलाओं और मातृत्व के अधिकारों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाता है। इससे महिलाओं को कानूनी प्रक्रियाओं में अधिक सम्मान और न्याय मिलेगा।



