विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वीकार किया है कि पहले वर्ष के लगभग 20 प्रतिशत छात्र इन संशोधित परिणामों से प्रभावित हुए हैं।
विश्वविद्यालय ने प्रभावित छात्रों से 5 जून तक पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने का आग्रह किया है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि एनईपी के नए नियमों के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे परिणाम से असंतुष्ट होने पर निर्धारित तिथि से पहले पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करें।
इस घटना से विश्वविद्यालय के छात्रों में चिंता का माहौल है। बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने पर सवाल उठ रहे हैं और छात्र संगठन मूल्यांकन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।



