अदालत ने आरोपियों को अंकिता के परिवार को मुआवजे के तौर पर 4 लाख रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने तीनों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर जुर्माना भी लगाया है। अंकिता के माता-पिता ने अदालत के इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है।
यह मामला सितंबर 2022 का है, जब 19 वर्षीय अंकिता भंडारी, जो ऋषिकेश के एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी, लापता हो गई थी और बाद में उसका शव एक नहर से बरामद हुआ था। जांच में सामने आया था कि रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके साथियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी थी, क्योंकि उसने उन्हें ‘विशेष सेवाएं’ प्रदान करने से इनकार कर दिया था। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था।



