बोकारो: बोकारो स्टील लिमिटेड (बीएसएल) एक बार फिर उग्र आंदोलन की चपेट में आ गया है। विस्थापित अप्रेंटिस संघ के सदस्य प्रेम महतो की मौत और आंदोलनकारियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में विस्थापितों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार देर रात से ही विस्थापितों ने बीएसएल प्रबंधन के मुख्य द्वार सहित अन्य गेटों को जाम कर दिया, जिससे पूरे प्लांट की सभी यूनिटें ठप हो गईं।
इस आंदोलन के कारण प्लांट में करीब 5,000 कर्मचारी अंदर ही फंसे रह गए और बाहर से किसी भी प्रकार की आवाजाही बंद हो गई। बीएसएल प्रबंधन के अनुसार, यूनिटों के बंद रहने से अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
मृत प्रेम महतो विस्थापित अप्रेंटिस संघ के सक्रिय सदस्य थे, जो अपने स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत थे। बुधवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई लाठीचार्ज की घटना में उनकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद से ही जिले में आक्रोश का माहौल बन गया।
विस्थापितों का आरोप है कि प्लांट प्रबंधन ने वर्षों से उन्हें रोजगार का आश्वासन दिया, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं, पुलिस प्रशासन और बीएसएल प्रबंधन पर भी आंदोलन को कुचलने की साजिश का आरोप लगाया गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है और आंदोलनकारियों से वार्ता का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, शुक्रवार सुबह तक कोई समाधान नहीं निकल सका है।
बीएसएल अधिकारियों ने बताया कि यदि स्थिति शीघ्र सामान्य नहीं हुई, तो उत्पादन में और अधिक नुकसान हो सकता है, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर इस्पात आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और बीएसएल प्रबंधन पर हैं कि वे इस तनावपूर्ण स्थिति को कैसे सुलझाते हैं और कर्मचारियों तथा स्थानीय विस्थापितों की मांगों का क्या हल निकलता है।



