दिल्ली-NCR में मौसम की क्रानॉलजी साइंटिस्ट्स को भी समझ नहीं आ रही। जनवरी में इतनी ठंड पड़ी कि 11 साल का रेकॉर्ड टूट गया। फरवरी इतना गर्म रही जितनी पिछले 17 साल में नहीं हुई थी। फिर मार्च आया और बादलों की फौज भी। पिछले चार सालों के दौरान मार्च में उतनी बारिश नहीं देखी गई जितनी इस साल हुई। अप्रैल में सबका मिक्सचर रहा। कभी तापमान ऊपर जाता, कभी बारिश से हल्की ठंड हो जाती। मई की शुरुआत भी तेज और ठंडी हवाओं के साथ हुई। दिल्ली-एनसीआर में कई जगह रुक-रुककर हल्की बारिश भी हो रही है। 1 मई की सुबह तो हल्की ठंड महसूस हुई। पानी इतना ठंडा था कि नहाने के लिए लोगों को गीजर यूज करना पड़ा। सोमवार को दिन के वक्त अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। न्यूनतम तापमान 21 डिग्री तक गिर सकता है, मतलब थोड़ी सर्दी का अहसास होगा। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह आंखमिचौली क्यों है, इस बारे में पिछले कई सालों का डेटा स्टडी करने के बाद कुछ कहा जा सकेगा।भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि क्लाइमेट चेंज का असर हो सकता है, लेकिन उसका असर जगह, सीजन और साल के हिसाब से बदलता रहता है। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एन्वायर्नमेंटल साइंस के प्रफेसर एपी दिमड़ी ने कहा कि दिल्ली में बदलते मौसम को क्लाइमेंट चेंज से जोड़कर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘दुनियाभर में गर्मी बढ़ रही है। लोकल लेवल्स पर कन्वेक्शन पैटर्न बदल रहा है और लू और तेज बारिश जैसे एक्सस्ट्रीम इवेंट्स हो रहे हैं।




