गोगोई ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
लोकसभा में बहस के दौरान गोगोई ने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों को बदनाम करने और समाज को विभाजित करने के लिए लाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अल्पसंख्यकों को हाशिए पर धकेलने की साजिश कर रही है।
गोगोई ने दावा किया कि इस बिल पर अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों से सही तरीके से चर्चा नहीं की गई।
2013 में यूपीए सरकार के दौरान इस मुद्दे पर कार्रवाई नहीं होने का दावा गलत बताया।
उन्होंने सवाल किया कि यह बिल अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने तैयार किया या किसी अन्य विभाग ने?
बिल के कुछ प्रावधानों पर उठाए सवाल
गोगोई ने धारा 3 का हवाला देते हुए कहा कि यह मुसलमानों की धार्मिक पहचान को प्रमाणित करने की बाध्यता डालता है।
उन्होंने पूछा कि क्या अब अन्य धर्मों के लोगों को भी अपना धार्मिक प्रमाण पत्र दिखाना होगा?
यह कदम संविधान के अनुच्छेद 26 के खिलाफ है, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार अल्पसंख्यकों को गुमराह कर रही है और ऐतिहासिक बलिदानों को नजरअंदाज कर रही है।
इतिहास का हवाला देते हुए सरकार को घेरा
गोगोई ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र किया और कहा कि मुस्लिम समुदाय ने भी योगदान दिया था।
उन्होंने मंगल पांडे, 2 लाख उलेमा शहीदों, और 1930 के दांडी मार्च में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी को याद दिलाया।
1926 में ब्रिटिश सरकार की ‘फूट डालो और राज करो’ नीति का विरोध करने वाले मुस्लिम नेताओं को याद किया।
मौलाना हुसैन अहमद मदनी द्वारा पूर्ण स्वतंत्रता की मांग का जिक्र किया।
महिलाओं के अधिकारों पर भ्रम फैलाने का आरोप
गोगोई ने सरकार पर महिलाओं के अधिकारों को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून पहले से ही महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की गारंटी देता है।
सरकार इसे ऐसे पेश कर रही है मानो इसमें महिलाओं के खिलाफ कोई प्रावधान हो।
बिल की जरूरत पर सवाल
गोगोई ने कहा कि 2023 में अल्पसंख्यक आयोग की चार बैठकें हुईं, लेकिन कहीं भी वक्फ संशोधन की जरूरत नहीं जताई गई।
सरकार स्पष्ट करे कि अचानक इस बिल को लाने की जरूरत क्यों महसूस हुई।
यह बिल एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने और उसे विभाजित करने के उद्देश्य से लाया गया है।
गठबंधन इस बिल के हर विवादित प्रावधान का विरोध करेगा।


