इस घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। इस मामले में अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
घटना होली के दिन उस समय हुई, जब गिरिडीह के मुख्य बाजार से होली का जुलूस निकाला जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस के दौरान दो गुटों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए, जबकि कुछ दुकानों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की और स्थिति को नियंत्रण में लाया। पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। पुलिस ने अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार किया है और हिंसा में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
इस घटना के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। झामुमो ने बीजेपी पर राज्य में सांप्रदायिक तनाव फैलाने का आरोप लगाया है। झामुमो के वरिष्ठ नेता ने कहा कि बीजेपी राजनीतिक लाभ के लिए प्रदेश की शांति व्यवस्था को भंग करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हिंसा में शामिल दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।
दूसरी ओर, बीजेपी ने झामुमो के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि गिरिडीह की घटना राज्य सरकार की विफलता का नतीजा है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ रही है और प्रशासन हिंसा रोकने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने राज्यपाल से इस घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हिंसा के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप भी एक बड़ा कारण है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति बनाए रखने की अपील की है।



