2019 में 26 करोड़ रुपये की लागत से इस भवन का निर्माण किया गया था, लेकिन अब तक इसे किसी शैक्षणिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सका है। हालांकि, अब राज्य सरकार ने इस भवन में पंडित रघुनाथ मुर्मू ट्राइबल यूनिवर्सिटी खोलने का निर्णय लिया है, जिससे यहां के आदिवासी छात्रों को उच्च शिक्षा का लाभ मिल सकेगा।
भवन निर्माण के बाद से बंद पड़ा है कैंपस
सिदगोड़ा के इस भवन का निर्माण 2019 में पूरा कर लिया गया था। शुरुआत में इसे एक प्रोफेशनल कॉलेज के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना थी, लेकिन प्रशासनिक अड़चनों और सरकार की उदासीनता के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार सरकार से इस भवन को शुरू करने की मांग की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नई सरकार ने लिया बड़ा फैसला
अब राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने इस भवन का उपयोग पंडित रघुनाथ मुर्मू ट्राइबल यूनिवर्सिटी के रूप में करने का फैसला किया है। यह निर्णय झारखंड के आदिवासी समुदाय के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इस यूनिवर्सिटी के शुरू होने से न केवल झारखंड के आदिवासी युवाओं को फायदा मिलेगा, बल्कि इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन लंबे समय से बिना उपयोग के पड़ा हुआ था, जिससे इसकी स्थिति खराब हो रही थी। अब यूनिवर्सिटी शुरू होने से न केवल भवन का सही उपयोग होगा, बल्कि आदिवासी समाज के बच्चों को उच्च शिक्षा का अवसर भी मिलेगा। स्थानीय नेता और समाजसेवी भी सरकार के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं।
सरकार ने दिया भरोसा
सरकार का कहना है कि ट्राइबल यूनिवर्सिटी की स्थापना का काम जल्द ही शुरू होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि यूनिवर्सिटी के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नए शैक्षणिक सत्र से इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई शुरू कर दी जाए। इससे झारखंड के आदिवासी छात्रों को अपने राज्य में ही बेहतर शिक्षा का अवसर मिलेगा।


