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तमिलनाडु ने नहीं किया रुपये का बहिष्कार, DMK नेता का सफाई बयान

हैदराबाद: तमिलनाडु में बजट 2025-26 के दौरान राज्य सरकार द्वारा रुपये के प्रतीक चिन्ह की जगह तमिल अक्षर 'ரூ' का उपयोग किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।

DMK के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि तमिलनाडु ने रुपये का बहिष्कार नहीं किया है।

विल्सन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने खुद 2017 में ‘ரூ’ का उपयोग किया था।

DMK नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि बीजेपी नेता बिना जानकारी के झूठ फैला रहे हैं।

उन्होंने कहा, “कल से मैं देख रहा हूं कि बीजेपी नेता कह रहे हैं कि तमिलनाडु ने रुपये का बहिष्कार किया है। ये पूरी तरह गलत जानकारी है।”

विल्सन ने बताया कि ‘ரூ’ अक्षर तमिल भाषा में ‘रुपया’ का पहला अक्षर है।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार सिर्फ तमिल शब्द का उपयोग कर रही है, हिंदी शब्द नहीं क्योंकि वे हिंदी थोपने से परेशान हो चुके हैं।

विल्सन ने कहा कि तमिल भाषा का समर्थन करना रुपये के बहिष्कार के समान नहीं है।

DMK नेता ने निर्मला सीतारमण पर आरोप लगाया कि वह चुनाव के दौरान तमिल पहचान अपनाती हैं, लेकिन बाकी समय इसे भूल जाती हैं।

विपक्षी बीजेपी ने राज्य सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना की है।

बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय प्रतीक चिन्हों का अनादर कर रही है।

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि उन्होंने अपनी भाषा के सम्मान में यह बदलाव किया है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि इस फैसले से राष्ट्रीय एकता पर असर पड़ सकता है।

तमिलनाडु सरकार ने साफ किया कि रुपये के प्रतीक चिन्ह का सम्मान बरकरार है।

राज्य सरकार का दावा है कि यह फैसला संविधान के दायरे में लिया गया है।

डीएमके ने इसे हिंदी थोपने के खिलाफ अपना विरोध जताने का प्रतीक बताया है।

भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर ‘भाषा राजनीति’ करने का आरोप लगाया है।

तमिलनाडु में पहले भी हिंदी थोपने के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।

यह विवाद ऐसे समय पर हुआ है जब दक्षिण भारत में क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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