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2050 तक भारत में 44 करोड़ लोग हो सकते हैं मोटापे के शिकार: रिपोर्ट

नई दिल्ली: भारत में 2050 तक 44 करोड़ से ज्यादा लोग मोटापे और अधिक वजन की समस्या से जूझ सकते हैं।

यह अनुमान एक वैश्विक अध्ययन में लगाया गया है, जो प्रतिष्ठित ‘द लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  1. 218 मिलियन पुरुष और 231 मिलियन महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की चपेट में होंगी।
  2. भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर होगा, चीन पहले और अमेरिका तीसरे स्थान पर रहेगा।
  3. अध्ययन ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) स्टडी 2021 के तहत किया गया है।
  4. 2021 में भारत में 180 मिलियन लोग मोटापे से ग्रसित थे, जिसमें 81 मिलियन पुरुष और 98 मिलियन महिलाएं थीं।
  5. 2050 तक, दुनिया में 3.8 बिलियन लोग अधिक वजन के शिकार हो सकते हैं।
  6. सब-सहारा अफ्रीका में यह संख्या 254.8% की वृद्धि के साथ सबसे ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।
  7. भारत में 5-14 साल के 1.6 करोड़ लड़के और 1.4 करोड़ लड़कियां मोटापे से ग्रसित हो सकती हैं।
  8. 15-24 साल के युवाओं में भारत दुनिया में सबसे आगे होगा।
  9. इस आयु वर्ग में 2.2 करोड़ पुरुष और 1.7 करोड़ महिलाएं मोटापे की चपेट में आ सकती हैं।
  10. मोटापा और अधिक वजन कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है, जैसे डायबिटीज, हार्ट डिजीज और हाई ब्लड प्रेशर
  11. इस संकट को रोकने के लिए स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव की जरूरत है।
  12. अध्ययन में बताया गया है कि शहरीकरण, जंक फूड और कम शारीरिक गतिविधि मोटापे के बढ़ते मामलों के पीछे मुख्य कारण हैं।
  13. चीन, भारत और अमेरिका मिलकर दुनिया के सबसे ज्यादा मोटे लोगों का बड़ा हिस्सा बनाएंगे।
  14. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य योजनाओं को लागू करना चाहिए।
  15. मोटापे से न केवल स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी बड़ा संकट बन सकता है।
  16. स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक आहार और फिटनेस के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
  17. रिपोर्ट के अनुसार, अगर जल्द ही कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या महामारी का रूप ले सकती है।
  18. कई विशेषज्ञ मीठे पेय पदार्थों और जंक फूड पर अधिक टैक्स लगाने की सलाह दे रहे हैं।
  19. स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए योग और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक पद्धतियों को अपनाने की अपील की जा रही है।
  20. अध्ययन के प्रमुख लेखक इम्मानुएला गकिडौ ने इसे “गंभीर सामाजिक विफलता” करार दिया है।

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