रविवार को ब्रिटेन के मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस समझौते को लेकर स्पष्ट संकेत दिए।
मुख्य बिंदु:
- यूक्रेन-अमेरिका मिनरल्स डील पर सहमति बनने के करीब है।
- लंदन में एक महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के बाद जेलेंस्की ने बयान दिया।
- शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक के बाद यह समझौता अधर में लटक गया था।
- ओवल ऑफिस में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच तीखी बहस भी हुई।
- ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन को अमेरिका के समर्थन के लिए ‘अधिक आभारी’ होना चाहिए।
- ट्रंप ने यह भी कहा, “अगर हम समर्थन बंद कर दें, तो यूक्रेन को अपने दम पर लड़ना पड़ेगा।”
- इस समझौते का उद्देश्य युद्ध के बाद यूक्रेन की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है।
- यूक्रेन में खनिज संपदाओं का विशाल भंडार है, जिसे अमेरिका के सहयोग से विकसित किया जा सकता है।
- जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश इस समझौते के लिए पूरी तरह तैयार है।
- हालांकि, ट्रंप के तीखे बयान से वार्ता में तनाव बढ़ गया।
- ट्रंप ने जेलेंस्की से कहा, “या तो समझौता करो या फिर हम हट जाएंगे।”
- अमेरिका पहले ही कह चुका है कि यह सौदा ‘बहुत ही निष्पक्ष’ होगा।
- यूक्रेन चाहता है कि यह समझौता जल्द से जल्द पूरा हो।
- यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अमेरिका उसका सबसे बड़ा समर्थक बना हुआ है।
- लेकिन अमेरिका का समर्थन कितना जारी रहेगा, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होगा।
- यूक्रेन के खनिज संसाधनों में अमेरिका की कंपनियां भारी निवेश करना चाहती हैं।
- इस सौदे से दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों पर असर पड़ेगा।
- जेलेंस्की ने संकेत दिए कि यूक्रेन को अमेरिका के समर्थन की सख्त जरूरत है।
- अब देखना होगा कि यह डील आगे बढ़ती है या नहीं।



