नई दिल्ली: भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. क़ुरैशी ने रविवार को उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि उनके कार्यकाल के दौरान भारत में मतदाता टर्नआउट बढ़ाने के लिए एक अमेरिकी एजेंसी से फंडिंग मिली थी।
उनका यह बयान तब आया जब अमेरिकी विभाग Department of Government Efficiency (DOGE), जो अरबपति एलन मस्क के नेतृत्व में है, ने कई सरकारी खर्चों में कटौती की घोषणा की।
इसमें भारत में मतदाता टर्नआउट बढ़ाने के लिए 21 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि को भी रद्द कर दिया गया।
DOGE ने शनिवार को X पर पोस्ट कर बताया कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा कई अनावश्यक कार्यक्रमों पर खर्च किया जा रहा था, जिनमें से कई अब रद्द कर दिए गए हैं। इस सूची में 486 मिलियन डॉलर की ग्रांट भी शामिल थी, जिसमें भारत के लिए 21 मिलियन डॉलर आवंटित किए गए थे।
एस. वाई. क़ुरैशी ने कहा कि 2012 में उनके कार्यकाल के दौरान चुनाव आयोग (ECI) और किसी अमेरिकी एजेंसी के बीच भारत में मतदाता टर्नआउट बढ़ाने के लिए कोई समझौता नहीं हुआ था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 2012 में चुनाव आयोग और इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर इलेक्टोरल सिस्टम्स (IFES) के बीच एक एमओयू (MoU) हुआ था। यह समझौता भारत के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) के तहत इच्छुक देशों को प्रशिक्षण देने के लिए था, ना कि भारत में मतदान बढ़ाने के लिए।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का IFES और अन्य चुनाव प्रबंधन निकायों के साथ सहयोग केवल प्रशिक्षण और संसाधन साझा करने तक सीमित था।



