उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में अजीत पवार के साथ गए नेताओं को बुरी तरह हराने की अपील की।
रविवार को सोलापुर जिले के माढा में एक रैली को संबोधित करते हुए शरद पवार ने 1980 के चुनावों की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे 52 विधायकों के पार्टी छोड़ने पर उन्होंने मेहनत कर उन्हें हराने का संकल्प लिया।
मैंने कुछ नहीं किया, बस तीन साल जनता से जुड़ा रहा। अगले चुनाव में मैंने सभी 52 के खिलाफ नए उम्मीदवार उतारे, और महाराष्ट्र की जनता ने उन्हें हराया।”
83 वर्षीय शरद पवार ने खुद को 1967 से अजेय बताते हुए कहा कि गद्दारी करने वालों को सबक सिखाना चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की, “इन्हें सिर्फ हराना नहीं, बल्कि बुरी तरह हराना है।”
इस दौरान उन्होंने कहा, “एक संदेश जाना चाहिए कि किसी से भी पंगा लो, लेकिन…” और रुकने पर भीड़ ने उनका नाम लेकर नारे लगाए।
पिछले साल एनसीपी का विभाजन हुआ जब अजीत पवार और आठ विधायकों ने एकनाथ शिंदे सरकार का साथ दिया। चुनाव आयोग के फैसले में अजीत पवार को पार्टी का नाम और ‘घड़ी’ चिन्ह मिला, जबकि शरद पवार गुट को ‘तुतारी बजाता व्यक्ति’ चिन्ह दिया गया।
एनसीपी (एसपी) ने बारामती विधानसभा सीट से शरद पवार के भतीजे युगेंद्र पवार को अजीत पवार के खिलाफ उतारा है। अजीत पवार 1991 से बारामती के विधायक हैं।
इस साल लोकसभा चुनाव में अजीत पवार ने अपनी पत्नी सुनेत्री पवार को बारामती से शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ उतारा था। सुप्रिया सुले ने सुनेत्री को आसानी से हराया। बाद में अजीत पवार ने स्वीकार किया कि यह उनकी गलती थी।



