आईसीएमआर के महानिदेशक राजीव बहल ने बताया है कि जीबीएस ज्यादातर संक्रमण के बाद होने वाला एक सिंड्रोम है जो आमतौर पर संक्रमण के 2 से 6 सप्ताह बाद सामने आता है।
आईसीएमआर के वैज्ञानिक इस बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए मरीजों के नमूनों की जांच कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि जीबीएस किसी बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण के बाद हो सकता है।
जीबीएस क्या है?
जीबीएस एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपनी ही तंत्रिकाओं पर हमला करती है। इससे शरीर के अंगों में कमजोरी और सुन्नता महसूस होती है।
जीबीएस के लक्षण:
- शरीर में कमजोरी
- सुन्नता
- दर्द
- चलने में कठिनाई
- सांस लेने में तकलीफ
जीबीएस का इलाज:
जीबीएस का इलाज संभव है। इसका इलाज आमतौर पर प्लाज्माफेरेसिस और इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी से किया जाता है।
ICMR क्या कर रहा है?
- आईसीएमआर जीबीएस के कारणों का पता लगाने के लिए शोध कर रहा है।
- आईसीएमआर जीबीएस के रोगियों के इलाज के लिए नए तरीकों का विकास कर रहा है।
- आईसीएमआर लोगों को जीबीएस के बारे में जागरूक कर रहा है।



