जातीय जनगणना के बहाने झारखंड में आरक्षण बढ़ाने का दांव? जानिए चंपई सोरेन की ‘इजाजत’ की इनसाइड स्टोरी
चुनाव में बाजी मारने के लिए झारखंड की जेएमएम के नेतृत्व वाली महागठबंधन की सरकार तमाम तरह के उपाय कर रही है। स्थानीयता और नियोजन नीति बनाने का बिल सरकार ने विधानसभा से तभी पारित करा लिया था, जब हेमंत सोरेन सीएम थे। हालांकि अलग-अलग कारणों से दोनों बिल अमल में नहीं आ पाए। हेमंत सोरेन की सरकार ने 11 नवंबर 2022 को आरक्षण बिल विधानसभा से पास कराया था। विधानसभा से पारित ओबीसी आरक्षण को राज्यपाल ने कई आपत्तियों के साथ लौटा दिया था। राज्यपाल की मंजूरी मिल जाती तो ओबीसी आरक्षण की सीमा 14 से बढ़ कर 27 फीसदी हो जाती। एसटी आरक्षण भी 26 की जगह बढ़ा कर 28 प्रतिशत कर दिया गया था। एससी को 10 के बजाय 12 प्रतिशत आरक्षण मिलता। ईडब्लूएस के लिए आरक्षण सीमा 10 प्रतिशत पहले से ही लागू थी। यानी हेमंत सरकार ने 77 प्रतिशत आरक्षण का प्रवाधान बिल में किया था। मनी लांड्रिंग मामले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झारखंड में बनी चंपई सोरेन की सरकार ने एक नया दांव चल दिया है। बिहार की तर्ज पर अब झारखंड में भी जाति गणना कराने की उन्होंने तैयारी कर ली है। इसके लिए सीएम ने कार्मिक विभाग को काम आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।
लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव पर नजर
दरअसल 2024 में लोकसभा के बाद विधानसभा के चुनाव भी झारखंड में होने हैं। जाति गणना लोकसभा के लिए वादे के तौर पर काम करेगी तो विधानसभा चुनाव में इसका लाभ भी महागठबंधन सरकार को मिल सकता है। जेएमएम को लोकसभा से अधिक चिंता विधानसभा चुनाव की है। किसी भी सूरत में पिछली बार से कम सीटें झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाला महागठबंधन विधानसभा में नहीं चाहता है। जिस तरह की तैयारी है, उससे यही लगता है कि लोकसभा का चुनाव खत्म होते ही जाति गणना का काम झारखंड में शुरू हो जाएगा। इससे जातियों की गिनती तो हो ही जाएगी, संख्या बल के हिसाब से आरक्षण और दूसरे लाभ भी लोगों को देने की योजना सरकार बना सकेगी। राजनीतिक हलके में माना जा रहा है कि यह महागठबंधन सरकार का बड़ा और कारगर दांव साबित हो सकता है।
कांग्रेस के विधायक प्रदीप यादव ने की थी पहल
उम्मीद की जाती है कि लोकसभा का चुनाव खत्म होते ही जाति गणना का काम झारखंड में शुरू हो जाएगा। इसलिए कि सीएम के निर्देश पर इसकी तैयारी में झारखंड के अधिकारी जुट गए हैं। सीएम ने कार्मिक विभाग के अफसरों को इस संबंध में प्रक्रिया तेज करने को कहा है। कांग्रेस विधायक दल के उपनेता प्रदीप यादव ने सबसे पहले इसकी जानकारी मिडिया को दी। प्रदीप यादव ने जाति गणना को लेकर सीएम को एक ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने शनिवार को सीएम से मुलाकात की थी। ज्ञापन में उन्होंने जातीय गणना कराने और पिछड़ों का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का आग्रह किया है। उनका दावा है कि सीएम ने उनके ज्ञापन के आलोक में ही जाति गणना की तैयारी का निर्देश कार्मिक विभाग को दिया है।



