पूर्णिमा नीरज सिंह ने राजनीति में एंट्री के पहले देखा था एक सपना, अचानक सब बदल गया, जानें चर्चित घराने की अनकही कहानी
देश ही नहीं बल्कि भूमिगत आग के लिए ‘झरिया’ की चर्चा आज दुनियाभर में होती है। वहीं देश में जिस इलाके से सबसे सबसे अधिक परिवारों का विस्थापन हुआ है, उसमें झरिया की गिनती सबसे प्रमुख क्षेत्र के रूप में होती है। इस क्षेत्र के सबसे बड़े राजनीतिक घराने की बहु बनकर पूर्णिमा नीरज सिंह झारखंड आईं, तो एक्टिव पॉलिटिक्स में आने के बारे में कभी सोचा भी नहीं था। 2017 में एक शाम अचानक दुःखद का सामना करना पड़ा। उनके पति और धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या कर दी गई। इस हमले में नीरज सिंह के कई सहयोगियों की भी मौत हो गई। पूर्णिमा नीरज सिंह के लिए यह खबर जिन्दगी के सबसे बड़े सदमे की तरह थी।
एक्टिव पॉलिटिक्स में आना एक संयोग
झारखंड विधानसभा टीवी के ‘जाने अपने विधायक को’ कार्यक्रम में पूर्णिमा नीरज सिंह ने खुद स्वीकार किया कि कभी उन्होंने एक्टिव पॉलिटिक्स में आने के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन अचानक परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी कि समाज सेवा के क्षेत्र में आने का निर्णय लेना पड़ा। पूर्णिमा नीरज सिंह बताती हैं कि पति नीरज सिंह की हत्या कर कुछ लोगों ने उन्हें अपने रास्ते से हटाने की कोशिश की। उनलोगों ने सोचा था कि न नीरज सिंह रहेंगे और न ही उनका नाम रहेगा। पति की हत्या ने पूरे जीवन को झकझोर दिया। इस कारण उन्होंने नीरज सिंह के अधूरे छोड़े कार्याें और सपने को पूरा करने का मन बनाया।
जनता का काम नहीं होने पर मायूसी
कांग्रेस विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह का कहना है कि दादा के साथ लंबे समय तक साथ रहने के कारण उन्हें राजनीति समेत हर क्षेत्र को करीब से देखा था। वहीं शादी के बाद धनबाद आईं, तो ससुराल में पति समेत परिवार के कई सदस्य पहले से ही राजनीति में सक्रिय थे। विभिन्न क्षेत्रों से लोग अपनी समस्या को लेकर आते थे। लेकिन जब पति के निधन के बाद वो खुद भी सामाज सेवा के क्षेत्र में आ गईं, तो लोगों से उनका सीधा संवाद शुरू हुआ। पूर्णिमा नीरज सिंह बताती हैं कि कई लोग अपनी छोटी-छोटी समस्या को लेकर उनके पास आते हैं, लेकिन कई तरह की प्रशासनिक बाध्यता और सरकारी प्रक्रिया जटिल होने के कारण काम होने में कभी-कभी विलंब हो जाता हैं। ऐसे में किसी का काम नहीं होता है, तो मायूसी होती है। लेकिन इसके बावजूद प्रयास बंद नहीं करतीं, वो लगातार उसे फॉलोअप करती रहती हैं। जिस व्यक्ति का काम रहता है, वह भी कुछ समय के लिए भूल जाता हैं, लेकिन मिलने पर फिर वो खुद याद दिलाती हैं और 90 प्रतिशत मामलों में लोगों को मदद करने में सफल होती हैं।



