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नवीन पटनायक ने यूं ही नहीं कर दी पीएम मोदी की तारीफ, जानिए रिश्तों की इनसाइड स्टोरी

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने विपक्ष के हमले झेल रहे पीएम नरेंद्र मोदी को बड़ी राहत दी है। उन्होंने पीएम मोदी के कामकाज की तारीफ की है और मोदी सरकार के कामकाज को 10 में से 8 नंबर दिए हैं। सीएम नवीन पटनायक ने केंद्र सरकार की विदेश नीति की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने कई मोर्चों पर बेहतर काम किया है, खासकर करप्शन कम हुआ है। रविवार को ओडिशा साहित्य महोत्सव में बोलते हुए उन्होंने महिला आरक्षण बिल पारित होने पर भी खुशी जताई। उन्होंने दावा किया कि 2019 में उन्होंने बीजू जनता दल (बीजेडी) के टिकट पर 33 प्रतिशत महिलाओं को लोकसभा चुनाव में उतारा था।

लोकसभा चुनाव से पहले नवीन पटनायक ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ अचानक नहीं की है। पहले भी संसद में कई बड़े मौकों पर उनकी पार्टी बीजू जनता दल केंद्र सरकार को भंवर से निकाल चुकी है। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), तीन तलाक, दिल्ली सर्विस बिल और कश्मीर से धारा 370 हटाने जैसे मुद्दे पर बीजेडी मोदी सरकार का समर्थन कर चुका है। हाल ही में मोदी सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव का भी नवीन बाबू की पार्टी ने विरोध किया था। एक देश, एक चुनाव के मुद्दे का भी वह समर्थन कर चुके हैं। अब 10 में 8 नंबर देकर नवीन पटनायक ने बीजेपी को कांग्रेस के हमले के सामने ढाल खड़ा कर दिया है। कांग्रेस खासकर राहुल गांधी अडाणी के मुद्दे पर करप्शन का आरोप लगाते हुए लगातार बीजेपी पर हमले कर रहे हैं।

कभी विपक्ष में नहीं रहे नवीन पटनायक
ओडिशा से सीएम नवीन पटनायक ऐसे सधे हुए राजनेता हैं, जिन्होंने पार्टी के गठन के साथ ही सत्ता सुख पा लिया। ओडिशा में जब से बीजेडी ने चुनाव लड़ना शुरू किया, तब से कभी विपक्ष में नहीं बैठी। नवीन पटनायक अपने पिता बीजू पटनायक के निधन के बाद दिसंबर 1997 उस दौर में राजनीति में उतरे, जब गठबंधन के नए-नए समीकरण साधे जा रहे थे। अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिनों की सरकार गिर चुकी थी। एच.डी देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे, मगर कांग्रेस से समर्थन से चलने वाली सरकार दबाव में थी। तब नवीन पटनायक ने अपने पिता की विचारधारा से अलग उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ मेलजोल बढ़ाया। उन्होंने बीजू जनता दल के नाम से पार्टी बनाई। 1998 के पहले चुनाव में ही बीजेडी को ओडिशा की 9 लोकसभा सीटों पर जीत मिली। बीजेपी भी पांच सीट जीतने में कामयाब हुई। माना जाता है कि बीजेडी को राजनीतिक तौर से स्थापित करने के लिए बीजेपी ने काफी मेहनत की थी। दोनों का गठबंधन एक दशक से अधिक समय तक चला।

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