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उत्तर प्रदेश पुलिस ने बचाई 38 हजार करोड़ की ठगी, 6 हजार बैंक खाते बंद… विदेशों से जुड़े हुए थे ठगी के तार

उत्तर प्रदेश के 15 लाख लोगों के साथ रची गई थी एक साजिश। 15 लाख लोगों के अकाउंट से होने थे लाखों रुपये पार। विदेशों में बैठकर खेला जा रहा है सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड का खेल। ये 15 लाख लोग कोई और नहीं बल्कि वो थे जिनका इंटरेस्ट ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी में है। हम आप जैसे लोग जिन्हें सोशल मीडिया की साइट्स से गेमिंग और बैटिंग के लिए ऑफर दी जा रही थी, लेकिन वक्त रहते यूपी पुलिस ने 38 हजार करोड़ रुपये की इस बड़ी ठगी को रोक लिया। हालांकि 600 करोड़ रुपये का चूना पहले ही लगाया जा चुका है

देश के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा

शाहगंज के एक पुलिस थाने में एक कंपनी ने करीब 5 महीने पर एक शिकायत दर्ज करवाई थी। ये शिकायत इसी मामले में थी। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। तो चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने आए। चीन, रूस, वियतनाम और फिलीपींस में बैठकर देश में की जा रही थी सबसे बड़ी ठगी। उत्तर प्रदेश के लोगों को इस ठगी का शिकार बनाया जा रहा था। ये लोग इन देशों के सर्वर के माध्यम से ओटीटी प्लेटफॉर्म से डाटा चुराकर री स्ट्रीमिंग के जरिए ठगी को अंजाम दे रहे थे।

सोशल साइट्स से सट्टेबाजी के लिए लोगों को दी जाती थी ऑफर

ये साइबर क्रिमिनल्स ओटीटी प्लेटफॉर्म से डाटा चुराकर लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए लोगों से सट्टा लगाते थे। अब बारी थी कि लोगों इस काम से कैसे जोड़ा जाए। इसके लिए विदेशों में बैठे इन ठगों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। ये ठग लोगों से व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसी साइट्स के जरिए जुड़ते थे और फिर उन्हें मोटा मुनाफा कमाने का लालच देते थे। ये लोगों को बैटिंग करने के लिए तैयार करते थे और शुरुआती दौर में सट्टा लगाने वाले लोगों को अच्छा खासा मुनाफा भी देते थे। बताया जा रहा है कि 30 प्रतिशत तक कमीशन दी जाती थी।

कई फर्जी वेबसाइट्स के जरिए कमाए जा रहे थे करोड़ रुपये

ये साइबर क्रिमिनल्स इस तरह की 25-30 वेबसाइट खोलकर बैठे हुए थे। कुछ समय तक एक वेबसाइट पर लोगों से सट्टा लगाते थे और उससे करोड़ रुपये कमा रहे थे, लेकिन उसके बाद जब कमाई करोड़ों में पहुंच जाती थी तो ये उस वेबसाइट को छोड़कर एक नई साइट तैयार कर लेते थे। इस तरह से कई वेबसाइट पर ये फर्जीवाड़े का काम कर रहे थे। लोग भी इनके जाल में फंसते जा रहे थे वजह थी शुरुआती दौर में अच्छी कमाई। लोगों को इनपर विश्वास होने लगा था और फिर इसी विश्वास का फायदा उठाकर ये लोगों से पैसा ऐंठ रहे थे।

कमीशन एजेंट को दी जाती थी मुनाफे की मोटी रकम

इन्हें उत्तर प्रदेश में तकरीबन हर जिले में अपना जाल फैला दिया था। इन्होंने अपने कमीशन एजेंट भी रखे थे जो इनकी पब्लिसिटी का काम देख रहे थे। एजेंट को कमीशन के रूप में मोटा पैसा दिया जाता था और उनका काम होता था लोगों को इस बैटिंग में फंसाना। इसके अलावा इन्होंने देश भर के बैंक में फर्जी खाते भी खुलवाए हुए थे। ये खाते भी यहां के लोकल एजेंट की मदद से ही खोले जाते थे। फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर खोले गए इन बैंक खातों की मदद से ही पैसों का लेनदेन हो रहा था। इसमें सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट दोनों शामिल हैं।

लोगों को 600 करोड़ रुपये का चूना लगाया जा चुका है

अब तक इन बैंक खातों के जरिए करीब 600 करोड़ रुपये की डील हो चुकी थी। इन ठगों की रोज की कमाई करोड़ों रुपये में होती थी और इसलिए कमिशन एजेंट को भी मोटा पैसा दे रहे थे। कई महीनों से ये खेल जारी था। अब पुलिस ने इस मामले में 6000 हजार फर्जी बैंक खाते बंद किए हैं। ये बैंक खाते विदेशों में बैठे इन्हीं अपराधियों के इशारे पर खुलवाए गए थे। इन खातों के जरिए 38 हजार करोड़ रुपये की डील होनी थी। पुलिस अब उन लोगों की पहचान कर रही है जो इनसे जुड़े हुए हैं। माना जा रहा है सट्टे के इस काले धंधे में कुछ बड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं। बैंक से जुड़े लोग भी इस साइबर फ्रॉड का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस और भी साइट्स की पहचान कर रही है जिसके जरिए ये बैटिंग की जाती थी।

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