ओडिशा के बौध जिले में 16 मार्च को पारा 43.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
मुंबई में 26 फरवरी को तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 6 डिग्री अधिक था।
जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन का संकेत है।
भारत में इस साल फरवरी और मार्च में रिकॉर्ड गर्मी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल-मई में भीषण गर्मी का खतरा बढ़ सकता है।
दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज हो रहा है।
रातों के तापमान में भी तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस बार फसलों पर भीषण गर्मी का बुरा असर पड़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
गर्मी के कारण अस्पतालों में लू और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़ने लगे हैं।
सरकार ने नागरिकों को पर्याप्त पानी पीने और धूप में बाहर निकलने से बचने की हिदायत दी है।
श्रमिकों और खुले स्थानों में काम करने वाले लोगों को पर्याप्त आराम करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस साल मार्च में ही देश के कई हिस्सों में हीटवेव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने पर जोर दिया है।
शहरी इलाकों में गर्मी का प्रभाव अधिक महसूस किया जा रहा है, जिससे लोग परेशान हैं।
मौसम विभाग ने आगामी दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना जताई है।
जल संरक्षण, वृक्षारोपण और हरित पहल को बढ़ावा देने की अपील की जा रही है।
गर्मी के इस रिकॉर्ड स्तर ने जलवायु संकट को लेकर नई चेतावनी दी है।
आने वाले दिनों में गर्मी से निपटने के लिए सरकार कई राहत उपायों पर विचार कर रही है।



