शर्मा पर आरोप था कि उन्होंने एक निजी कंपनी से 29 लाख रुपये की रिश्वत ली थी।
एसीबी ने शर्मा को 30 सितंबर 2014 को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए 5 साल की सजा सुनाई है।
यह मामला उस समय सामने आया था जब एक निजी कंपनी ने आरोप लगाया था कि शर्मा ने उनसे एक परियोजना को मंजूरी देने के लिए रिश्वत मांगी थी। कंपनी ने इस मामले की शिकायत एसीबी से की थी। एसीबी ने मामले की जांच की और शर्मा को गिरफ्तार किया।
यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी जीत मानी जा रही है। यह दिखाता है कि कोई भी भ्रष्टाचार के आरोपों से बचा नहीं सकता है।



