भारत के स्थायी प्रतिनिधि, पी. हरीश ने गुरुवार को इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशंस प्लेनरी में कहा कि आतंकवादी संगठनों को ब्लैकलिस्ट करने के अनुरोधों को अस्वीकार करने या रोकने की प्रक्रिया सार्वजनिक नहीं की जाती और यह कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित रहती है, जिसे उन्होंने “छुपा हुआ वीटो” करार दिया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर जब दुनिया संयुक्त राष्ट्र की शांति और सुरक्षा कायम रखने की क्षमता पर सवाल उठा रही है। उन्होंने परिषद के काम करने के तरीकों में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके सहायक निकायों में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए।
हरीश ने उदाहरण देते हुए कहा कि आतंकवादी संगठनों को ब्लैकलिस्ट करने के फैसले तो सार्वजनिक किए जाते हैं, लेकिन जब किसी सूचीबद्ध करने के अनुरोध को खारिज किया जाता है या रोका जाता है, तो इसकी जानकारी केवल कुछ देशों को ही होती है। उन्होंने इसे “छुपा हुआ वीटो” बताया।
भारत लंबे समय से इस बात पर चिंता जताता रहा है कि UNSC की सहायक समितियां, खासकर 1267 अल-कायदा प्रतिबंध समिति, आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को ब्लैकलिस्ट करने के अनुरोधों को कैसे संभालती हैं। भारत ने आरोप लगाया कि कई बार पुख्ता सबूतों के बावजूद आतंकवादियों को ब्लैकलिस्ट करने के अनुरोधों को बिना किसी ठोस कारण के रोका जाता है।
दिल्ली ने इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जब UNSC आतंकवाद से निपटने के अपने दायित्वों की बात करता है, तो उसका रवैया दोहरा दिखाई देता है। चीन, जो पाकिस्तान का नजदीकी सहयोगी है, ने कई मौकों पर भारत द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों को ब्लैकलिस्ट करने के प्रयासों को रोका है।
भारत ने यह भी कहा कि भले ही संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देश सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत को स्वीकार करते हैं, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है।



