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जर्नलिस्ट बॉयकॉट.. चंद्रयान..! सर, आप क्या कहेंगे? राजनीति की पटरी पर सीएम नीतीश के बोल

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उन नेताओं में नहीं जो बगैर राजनीतिक लाभ-हानि को सोचे बगैर कुछ भी कह जाते हैं। बयानों के मामले में नीतीश कुमार शुद्ध और सफल व्यवसायी की तरह हैं। वे तनाव में रहें या सामान्य, एकदम तराजू पर तौल कर शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। उन्हें काल, समय और स्थान का पूरा ख्याल रखता है। कब क्या बोलना है, कितना बोलना है, इस मामले में उन्हें डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त है। हाल ही में देश के कुछ नामचीन पत्रकारों के बॉयकॉट मामले पर नीतीश कुमार ने जो प्रतिक्रिया दी है उससे आप समझ सकते हैं कि नीतीश कुमार बयानों के प्रति कितने सतर्क रहते हैं।

पत्रकारों के बॉयकॉट पर क्या कहा सीएम ने

‘इंडिया’ गठबंधन के सदस्यों की ओर से विभिन्न टेलीविजन चैनल के एंकर का बहिष्कार करने के बारे में किसी तरह की जानकारी होने से इनकार सीएम नीतीश ने इनकार किया। उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन के कुछ सदस्यों को लगा होगा कि टीवी एंकर के साथ कुछ दिक्कतें हो सकती हैं और इसलिए उन्होंने यह निर्णय किया होगा। लेकिन मैं हमेशा प्रेस की स्वतंत्रता के पक्ष में रहा हूं। जिस पर केंद्र की सत्ता में बैठे लोगों की ओर से हमला किया जा रहा है। मैं मौजूदा शासन को परास्त किए जाने के बाद, आपको आपके पेशे को लेकर पूरी आजादी देने का आश्वासन देता हूं। जब सभी को पूरी आजादी मिलेगी, तो पत्रकार वही लिखेंगे जो वे चाहते हैं। क्या वे नियंत्रित हैं? क्या मैंने कभी ऐसा किया है? उनके पास अधिकार हैं, मैं किसी के खिलाफ नहीं हूं?

कितना सच, कितनी मजबूरी

पत्रकारों के बॉयकॉट मामले पर नीतीश कुमार की अनजान बने रहने की प्रतिक्रिया राजनीति का ही एक हिस्सा है। अनजान बने रहने की मजबूरी भी है। दरअसल विपक्षी एकता मुहिम के सूत्रधार बनने की हिम्मत करने वाले नीतीश कुमार जानते हैं कि किस-किस तरीके और कितना जतन कर INDIA गठन में कामयाबी मिली है। यह कामयाबी इतनी मजबूत स्तर पर मिली है जिसकी धमक ने बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को भी परेशान कर दिया है। ऐसे में नीतीश कुमार अपने गठबंधन दल के किसी साथी के कदम का विरोध कर इंडिया गठबंधन में फूट डालने की नींव रखने की कोशिश नहीं करेंगे। इसलिए पत्रकारों के बॉयकॉट मामले से अनजान बने रहना ही श्रेयस्कर है। और उन्होंने यही रास्ता ढूंढते हुए उस घटना से अनजान बन गए। पत्रकारों से ही सवाल कर बैठते हैं कि क्या मैं ऐसा करता हूं? और लगे हाथ वादा भी कर बैठते हैं कि…’प्रेस को लेकर पूरी आजादी देने का आश्वासन देता हूं। जब सभी को पूरी आजादी मिलेगी, तो पत्रकार वही लिखेंगे जो वे चाहते हैं।’

चांद पर चंद्रयान के उतरने पर भी अनभिज्ञ रहे नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पत्रकारों ने जब पूछा कि सर चंद्रयान-3 की लैंडिंग हो रही है, क्या कहेंगे? सवाल पूछे जाते ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अनजान बन जाते हैं और वे पास में खड़े भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी से पूछते हैं। उसके बाद सीएम पत्रकारों की तरफ मुखातिब होते हुए कहते हैं, ‘चलिये ये तो अच्छी बात है। हो रहा है तो ठीक है। पर बाद में उन्हें लगा कि यह ठीक स्ट्रोक नहीं लगा तो उन्होंने फिर कहा कि चंद्रयान-3 की चांद पर सफल लैंडिंग कराकर भारत ने अंतरिक्ष में एक नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चांद पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग पर हर भारतवासी गौरवान्वित है। यह इसरो के वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत का नतीजा है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं।

क्या है राजनीतिक मजबूरी

चंद्रयान 3 का चांद के दक्षिण ध्रुव पर उतरने की जानकारी नीतीश कुमार को नहीं हो सकती पर इंजीनियर नीतीश कुमार को जानकारी न हो इसकी संभावना नहीं के बराबर है। हालांकि वो तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं कर सके तो इसकी वजह यह थी कि तारीफ करेंगे तो यह नरेंद्र मोदी की सरकार को प्लस कर जाएगा। कंडेम करते तो नीतीश कुमार की नकारात्मक राजनीति उजागर होती। परंतु मीडिया जगत में जब नीतीश कुमार की अनभिज्ञता को मुद्दा बनाया जाने लगा तब उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों को श्रेय देते उनके प्रशंसनीय कार्य की खूब तारीफ की।

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