सुहाग रात से जुड़ी गलतफहमियां, जिनके बारे में लड़के-लड़की को जरूर पता होना चाहिए
शादी को नई जिंदगी की शुरुआत कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब लड़का और लड़की पति-पत्नी बनकर शादीशुदा जीवन में पहला कदम रखते हैं, तो वो उनके लिए हर तरह से नया अनुभव होता है। चाहे दो लोगों के बीच आपसी समझ बैठाते हुए रिश्ते की नींव बनाने की शुरुआत हो या फिर कंधों पर आईं जिम्मेदारियों को पूरा करने की अपेक्षाओं का भार, शादीशुदा जोड़े के लिए पहले जैसा कुछ भी नहीं रह जाता है। इस नई शुरुआत से जुड़े सबसे बड़े पलों में से एक सुहाग रात है, जिसे लेकर न जाने कितनी तरह की सोच और गलतफहमियां हैं, जो जोड़े के मन में पहले ही डर पैदा कर देती हैं।
जो कहा और दिखाया वो सच हो जरूरी नहीं
फर्स्ट नाइट को लेकर जोड़े को शादी से पहले ही कई चीजें सिखाने की कोशिश की जाती है, जो ज्यादातर पुरानी सोच वाली होती हैं। वहीं फिल्मों और सीरियल में भी इसे हमेशा एक टिपिकल रोमांटिक तरीके से दिखाया जाता है। हालांकि, जो भी कहा और दिखाया जाता है, वो सबके लिए सच साबित हो, ऐसा जरूरी नहीं।
सुहाग रात का मतलब सिर्फ इंटिमेसी नहीं
सुहाग रात का मतलब सिर्फ इंटिमेसी नहीं होता है। अगर इसे अलग नजरिए से देखा जाए, तो शादी की भागदौड़ के बाद ये वो पहला पल होता है, जब न्यूली मैरिड कपल एक-दूसरे के साथ समय बिता पाता है। ये वो पल होता है, जब लड़का-लड़की पहली बार पति-पत्नी के रूप में एक-दूसरे के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं, जो फिजिकल इंटिमेसी से ज्यादा अहम और प्यारा होता है।




