जजों की नियुक्ति पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार: “कॉलेजियम सर्च कमेटी नहीं”
सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति प्रक्रिया में केंद्र सरकार की भूमिका को लेकर एक बार फिर सख्त रूख अपनाया है।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई और कहा कि “कॉलेजियम किसी सर्च कमेटी की तरह काम नहीं करता है।”
यह मामला तब सामने आया जब एक जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें सरकार से उच्च न्यायालयों में जजों के पदों को भरने के लिए कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को जल्द से जल्द अधिसूचित करने की मांग की गई थी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से उन उम्मीदवारों की सूची मांगी जिनके नामों को कॉलेजियम द्वारा दोहराया गया था, लेकिन अभी तक उन्हें मंजूरी नहीं दी गई है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “यदि कॉलेजियम केवल एक खोज समिति होती, तो आपके पास विवेक होता। लेकिन, विचार यह नहीं है कि किसी के अतीत की कमियों का पता लगाया जाए, बल्कि आगे बढ़ने का लक्ष्य है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दोहराए गए नामों को मंजूरी क्यों नहीं दी गई है।
बता दें कि कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। यह समिति हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए सिफारिशें करती है।
यह विवाद का विषय रहा है कि क्या केंद्र सरकार को कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी देने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में कहा है कि सरकार को सिफारिशों को अस्वीकार करने के लिए ठोस कारण देने चाहिए।



