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कर्नाटक सरकार ने जातिगत जनगणना रिपोर्ट को दी मंजूरी, 17 अप्रैल को होगी विशेष बैठक में चर्चा.

कर्नाटक कैबिनेट ने शुक्रवार को विवादास्पद सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण यानी जातिगत जनगणना रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है।

इस रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा 17 अप्रैल को होने वाली विशेष कैबिनेट बैठक में की जाएगी।

बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने की।

यह सर्वेक्षण 2015 में कर्नाटक पिछड़ा वर्ग स्थायी आयोग द्वारा कराया गया था।

उस समय आयोग के अध्यक्ष एच. एन. कंठराज थे, जिसे बाद में जे. जयप्रकाश हेगड़े ने अंतिम रूप दिया।

रिपोर्ट को लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले अंतिम रूप दिया गया।

रिपोर्ट में विभिन्न जातियों और समुदायों से संबंधित जानकारी दी गई है।

यह रिपोर्ट 50 वॉल्यूम्स में तैयार की गई है।

सभी कैबिनेट मंत्रियों को इसकी प्रतियां दी जाएंगी ताकि वे रिपोर्ट का अध्ययन कर सकें।

मंत्री शिवराज तंगडगी ने कहा कि सुझावों के आधार पर रिपोर्ट के अमल पर निर्णय होगा।

कांग्रेस पार्टी ने 2023 विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनावों के दौरान रिपोर्ट को स्वीकार करने का वादा किया था।

हालांकि लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों के विरोध के चलते इसमें देरी हुई।

इन दोनों समुदायों का कहना है कि रिपोर्ट में उनकी जनसंख्या कम दिखाई गई है।

उनका यह भी आरोप है कि सर्वे वैज्ञानिक तरीके से नहीं किया गया।

दूसरी ओर, पिछड़ा वर्ग और एससी/एसटी समुदाय रिपोर्ट को लागू करने की मांग कर रहे थे।

इससे सरकार पर दोनों ओर से दबाव बना हुआ था।

अब रिपोर्ट स्वीकार करने के फैसले को सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

17 अप्रैल को होने वाली विशेष बैठक में लागू करने को लेकर अंतिम फैसला हो सकता है।

रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने से पहले मंत्रियों से राय ली जाएगी।

यह निर्णय राज्य की सामाजिक नीति और आरक्षण ढांचे पर बड़ा असर डाल सकता है।

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