बिहार में यहां श्मशान घाट में होती है दुर्गा पूजा, तांत्रिक ने स्थापित किया था मां तारा की मूर्ति
बिहार के सीतामढ़ी श्मशान घाट में दुर्गा पूजा होती है, वह भी वर्षों से। यह जानकर हर किसी को थोड़ी देर के लिए यकीन नहीं होगा, लेकिन सौ फीसदी सच है। यह पूजा जिले के डुमरा प्रखंड के माधोपुर रौशन पंचायत के शिवपुरी भीसा गांव में होती है। जिला ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार का यह एकमात्र गांव होगा, जहां श्मशान में ही मां दुर्गा जी की पूजा होती है। यहां पर वर्ष 2001 से लगातार दुर्गा पूजा होती आ रही है। आखिर श्मशान में ही क्यों पूजा होती है?

क्या है श्मशान में पूजा की कहानी
बताया गया है कि गांव के सहदेव राय, डीलर और पूर्व मुखिया अवध किशोर यादव ने तारा पीठ में जाने-माने तांत्रिक ललन दुबे से संपर्क किये थे। दोनों ने उनसे अपने गांव में आने के लिए आमंत्रित किया था और उनके नेतृत्व में एक मंदिर के निर्माण की इच्छा व्यक्त की थी। आग्रह पर तांत्रिक दुबे भीसा गांव पहुंचे थे। यह बात वर्ष 2001 की है। तांत्रिक ने मां तारा की मूर्ति स्थापित करने के लिए भूमि की तलाश शुरू की। पूर्व मुखिया अवध किशोर यादव ने मंदिर के लिए अपनी भूमि देने की इच्छा व्यक्त की। तांत्रिक दुबे ने जांच कर उनकी भूमि को खारिज कर दिया।

दाह संस्कार वाले जगह बना मंदिर
काफी मशक्कत के बाद श्मशान की भूमि को मां तारा की मंदिर के लिए उपयुक्त माना गया। हालांकि यहां भी एक पेंच फंस गया। इंतजार था एक खास जाति की महिला के शव के दाह-संस्कार होने का। ग्रामीण सहदेव राय ने बताया कि वह दिन आया जब संबंधित जाति की महिला का दाह संस्कार हुआ और उसी जगह मां तारा की मूर्ति स्थापित कर दी गई। उसके बाद तांत्रिक दुबे चले गये। उसी वर्ष से मां दुर्गा जी की पूजा हो रही है।



