छत्तीसगढ़ के गांव में शादी में पौधे देने की अनोखी परंपरा, पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया कदम
धमतरी: छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव, परस्तराई, में विवाह समारोहों में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जो पारंपरिक सोने-चांदी के गहनों और महंगे तोहफों से हटकर है।
यहां लोग शादी में पौधे तोहफे के रूप में देते हैं, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह परंपरा, जो अब दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन से जुड़े खतरों के बीच प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए की जा रही है। गांववाले मानते हैं कि जब विश्वभर में जलवायु संकट पर चर्चाएं हो रही हैं, तो इस छोटे कदम से पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना एक महत्वपूर्ण कार्य है।
यह परंपरा 5 जून 2024 को शुरू हुई, जब परस्तराई गांव के लोगों ने फैसला किया कि हर शादी में लड़की को फलदार पौधा दिया जाएगा। इसी के तहत जब गांव की लड़की बिदा होकर ससुराल जाती है, तो उसे ‘मुंह दिखाई’ के समय फलदार पौधा उपहार में दिया जाता है।
गांव के सरपंच परमेश्वर आदिल ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत तब हुई जब गांव के भूपेंद्र श्रीवास्तव की शादी पेंदरवानी की वासिनी से हुई और उन्हें ‘आंवला’ का पौधा तोहफे में दिया गया। अब यह परंपरा पूरे गांव में फैल चुकी है।
भूपेंद्र ने कहा, “यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है और मैं सभी गांववालों का आभार व्यक्त करता हूं।” वहीं, वासिनी ने भी इस पहल का स्वागत किया और कहा कि वह इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनकर खुश हैं।



