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सेरेब्रल पाल्सी का मरीज बना डॉक्टर, ये कहानी हालात से टकराना सिखाती है

यह बिल्कुल किसी सपने के सच होने जैसा ही था। जब अहमदाबाद के रहने वाले 23 साल के स्मित मोदी ने पिछले हफ्ते एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और फिर उनके नाम के आगे डॉक्टर लग गया। सेरेब्रल पाल्सी (सीपी) से पीड़ित स्मित को बीजे मेडिकल कॉलेज से अपनी डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वह न्यूरो-मस्कुलर प्रॉब्लम से ग्रसित थे। जो चलने-फिरने में बाधा डालती है और लंबे समय तक खड़े होने से रोकती है, लेकिन स्मित ने कठित चुनौती के बाद भी अपनी मंजिल को पा लिया।

बहुत कम हैं स्मित जैसे छात्र
स्मित मोदी की कामयाबी इसलिए अधिक अहम है, क्योंकि मेडिकल में प्रवेश के लिए ‘विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी)’ कोटा वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन सेरेब्रल पाल्सी के साथ चिकित्सा में करियर बनाने वाले छात्र बहुत कम हैं। स्मित बताते हैं कि मेरे कुछ साथी, सीनियर और जूनियर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी स्थितियों से पीड़ित हैं, लेकिन मैंने सीपी से पीड़ित किसी को भी नहीं देखा है। मुझमें 70 फीसदी विकलांगता है, लेकिन सौभाग्य से इसने मेरे पढ़ाई में कोई बाधा नहीं डाली। स्मित के अनुसार उन्होंने कोविड महामारी के दौरान भी अपने साथियों के साथ काम किया। वार्ड में ड्यूटी पर तैनात रहे।

पिता ने मां को दिया सफलता का श्रेय
स्मित ने अब अपनी मेडिकल इंटर्नशिप शुरू कर दी है। उनके पिता अनिल मोदी सीमेंट के ठेकेदार हैं। बेटे की सफलता पर अनिल कहते हैं कि मेरी पत्नी ने बेटे में विज्ञान के प्रति दिलचस्पी को नोटिस किया। इसके बाद उन्होंने स्मित को इस दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अनिल कहते हैं कि छह महीने की उम्र में हमें स्मित को सीपी होने का पता चला था। दूसरे माता-पिता के की तरफ हमने भी चुंबक चिकित्सा से लेकर व्यायाम के अलावा हर एक सुझाव में दी गई चीज का आजमाया। आखिर में हम दोनों हम इस तथ्य पर सहमत हुए कि स्मित को सीपी के साथ रहना होगा। पिता अनिल के अनुसार मुश्किलों का अंत नहीं हुआ, बल्कि जब स्मित की आयु 15 साल की हुई तो उसके दोनों पैरों लिंगामेंट की सर्जरी करवानी पड़ी, क्यों कि स्मित के पैर 45 डिग्री तक मुड़ गए थे।

चुनौतियों से लड़कर जीती बाजी
स्मित ने आज भले ही डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी करके एक सपने को पूरा किया है, लेकिन जब स्मित को 10वीं की बोर्ड परीक्षा देनी थी। तो गिरने के कारण स्मित को उस वक्त दर्द वाली गोलियां खाकर परीक्षा देनी पड़ी। स्मित अब अपने आप से चल सकता है। स्मित को केवल लंबे समय तक खड़े रहने में कठिनाई होती है। स्मित हमारे परिवार में पहले डॉक्टर हैं, और हमें उनकी उपलब्धियों पर बेहद गर्व है। पिता बताते हैं कि स्मित ने 10वीं में 82 फीसदी नंबर हासिल किए थे। इसके बाद गुजरात में NEET परीक्षा में विकलांगता कोटा में दूसरे स्थान पर रहे थे। स्मित का कहना है कि विकलांगता आपको पढ़ने से नहीं रोकती है। मैं अब त्वचा विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल करना चाहता हूं, क्योंकि इसमें बहुत अधिक मूवमेंट की जरूरत नहीं होती है।

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